इंटरनेशनल एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। ओवर्सिज इन्वेस्टमेंट पर **$1 बिलियन** की लिमिट हिट होने के कारण नए यूनिट्स नहीं बन पा रहे हैं, जिससे कई ETF अपने NAV (नेट एसेट वैल्यू) से कहीं ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने निवेशकों को इंटरनेशनल ETFs की असामान्य कीमतों को लेकर आगाह किया है। हाल के हफ्तों में कई ETFs अपने असल NAV के मुकाबले 'डबल डिजिट' प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जिसका मतलब है कि निवेशक फंड की असली वैल्यू से कहीं ज्यादा दाम चुका रहे हैं।
निवेश लिमिट का असर
इस प्राइस डिस्टॉर्शन (कीमतों में असंतुलन) की मुख्य वजह रेगुलेटरी कैप है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए ओवर्सिज निवेश की सीमा $1 बिलियन तक सीमित है, जो फिलहाल पूरी हो चुकी है। इसका नतीजा यह है कि फंड हाउस नए यूनिट्स जारी नहीं कर पा रहे हैं। सामान्य स्थितियों में 'आर्बिट्राज' (Arbitrage) के जरिए मार्केट प्राइस NAV के करीब रहता है, लेकिन यूनिट्स की सप्लाई रुकने से मार्केट प्राइस और NAV के बीच का अंतर बढ़ गया है।
क्यों है यह प्रीमियम बड़ा रिस्क?
निवेशक अक्सर बढ़ते मार्केट प्राइस को इंडेक्स की मजबूती समझ लेते हैं, जबकि यह केवल यूनिट्स की कमी के कारण हो रहा है। यदि आप 50% के प्रीमियम पर कोई ETF खरीदते हैं, तो आप उसकी वास्तविक वैल्यू से बहुत ज्यादा पैसा दे रहे हैं। अगर डिमांड कम होती है या रेगुलेटरी स्थिति में बदलाव आता है, तो यह प्रीमियम तेजी से खत्म हो सकता है। ऐसे में यदि विदेशी इंडेक्स (जैसे Nasdaq) ऊपर भी जाए, तो भी निवेशक को नुकसान हो सकता है क्योंकि प्रीमियम का गिरना इंडेक्स के मुनाफे को पूरी तरह मिटा देगा।
बड़े बदलाव आने वाले हैं
रेगुलेटर्स इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। 7 सितंबर, 2026 से नए फ्रेमवर्क लागू किए जा चुके हैं। वहीं, 1 अप्रैल, 2027 से एक बड़ा बदलाव होने वाला है, जिसमें ETF प्राइस बैंड्स का बेस प्राइस 'पिछले कारोबारी दिन के NAV' के आधार पर तय होगा। यह कदम मार्केट प्राइस को वास्तविक वैल्यू के करीब लाने के लिए है, जिससे ऊंचे प्रीमियम वाले ETFs में तेज गिरावट आ सकती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
किसी भी इंटरनेशनल ETF में ऑर्डर डालने से पहले म्यूचुअल फंड हाउस या एक्सचेंज की वेबसाइट पर जाकर उसका लेटेस्ट NAV या iNAV (इंडिकेटिव NAV) जरूर चेक करें। अगर मार्केट प्राइस रिपोर्टेड NAV से काफी ज्यादा है, तो निवेश करने से बचें। याद रखें, ट्रेडिंग ऐप्स पर दिखने वाली कीमत हमेशा एसेट्स की सही वैल्यू नहीं दिखाती है।
