SEBI के नए स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) फ्रेमवर्क ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एक नए युग की शुरुआत की है। इसी रेगुलेटरी बदलाव के तहत, Union Mutual Fund ने अपना Arthaya Equity Long Short Fund लॉन्च किया है।
यह फ्रेमवर्क, जो 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी हुआ है, पारंपरिक म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के बीच की खाई को पाटने का काम करेगा। SIF फ्रेमवर्क फंड मैनेजर्स को डेरिवेटिव्स (derivatives) का अधिक उपयोग करने और लॉन्ग (long) व शॉर्ट (short) दोनों तरह की पोजीशन लेने की फ्लेक्सिबिलिटी देता है, जो पहले म्यूचुअल फंड के लिए सीमित था। SIFs के लिए न्यूनतम निवेश राशि ₹10 लाख रखी गई है।
Arthaya Equity Long Short Fund की रणनीति अच्छी कमाई की उम्मीद वाली कंपनियों में लॉन्ग पोजीशन लेना और ओवरवैल्यूड या कमजोर कंपनियों में सेलेक्टिव शॉर्ट पोजीशन लेना है। इस 'लॉन्ग-शॉर्ट' रणनीति का मकसद बाजार के हर दौर में रिटर्न जेनरेट करना और वोलेटिलिटी (volatility) के खिलाफ बचाव करना है। यह पारंपरिक 'लॉन्ग-ओनली' फंड्स से अलग है, जो मुख्य रूप से बढ़ते बाजार का फायदा उठाते हैं।
यह नया SIF सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है। लॉन्चिंग के करीब छह महीनों में ही इस सेगमेंट ने ₹10,000 करोड़ से अधिक की असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) जमा कर ली है। Union Mutual Fund के अलावा, HSBC, Kotak, Mirae Asset, Tata, SBI और Edelweiss जैसे कई बड़े फंड हाउसेज भी SIF स्पेस में उतर चुके हैं या तैयारी कर रहे हैं।
Union Mutual Fund की ओर से, CEO मधु नायर (Madhu Nair) ने राजेश ऐनर (Rajesh Aynor) को SIF प्लेटफॉर्म के लिए इन्वेस्टमेंट लीड नियुक्त किया है, जिनके पास हाइब्रिड और लॉन्ग-शॉर्ट रणनीतियों के प्रबंधन का 20 साल से अधिक का अनुभव है। फंड की पैरेंट कंपनी Union Bank of India है।
Arthaya Equity Long Short Fund एक ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम है, जिसका न्यूनतम निवेश ₹10 लाख है। इसका न्यू फंड ऑफर (NFO) पीरियड 4 मई से 18 मई, 2026 तक है। NFO के दौरान यूनिट की कीमत ₹10 रखी गई है, और एक साल के भीतर रिडेम्पशन (redemption) पर 1% का एग्जिट लोड (exit load) लागू होगा। फंड का बेंचमार्क NIFTY 200 टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) होगा।
हालांकि SIF फ्रेमवर्क अधिक फ्लेक्सिबिलिटी देता है, पर इसमें अंतर्निहित जोखिम भी हैं। फंड मैनेजर की स्किल और एग्जीक्यूशन क्षमता पर सफलता काफी निर्भर करती है। कुछ SIFs ने हाल के बाजार करेक्शन के दौरान गिरावट भी दिखाई है, जिसका मतलब है कि ये फंड भी बाजार की मंदी से अछूते नहीं हैं। इसके अलावा, 2026 की शुरुआत में NFO मार्केट में नरमी देखी गई है, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।
