म्यूचुअल फंड का ₹3,811 करोड़ पड़ा लावारिस! ऐसे करें अपना पैसा क्लेम

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AuthorMehul Desai|Published at:
म्यूचुअल फंड का ₹3,811 करोड़ पड़ा लावारिस! ऐसे करें अपना पैसा क्लेम

31 मार्च 2026 तक म्यूचुअल फंड में लावारिस पड़ी राशि बढ़कर ₹3,811 करोड़ हो गई है, जो पिछले साल के मुकाबले **10.4%** ज्यादा है। यह पैसा पुराने रिकॉर्ड्स के कारण निवेशकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। SEBI के MITRA प्लेटफॉर्म और RTA वेबसाइट्स का इस्तेमाल करके आप अपनी इनएक्टिव फोलियो को ढूंढकर KYC अपडेट करके फंड वापस पा सकते हैं।

₹3,811 करोड़ की लावारिस रकम!

31 मार्च 2026 तक भारतीय म्यूचुअल फंड्स में लावारिस पड़े पैसों की कुल कीमत ₹3,811 करोड़ तक पहुंच गई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के मुकाबले इसमें 10.4% की बढ़ोतरी हुई है, जो बताता है कि कई निवेशक अपने निवेश पर नजर नहीं रख पा रहे हैं। इस रकम में सबसे बड़ा हिस्सा अनक्लेम्ड डिविडेंड (unclaimed dividends) का है, जो 15.7% बढ़कर ₹2,689 करोड़ हो गया है। वहीं, अनक्लेम्ड रिडेम्पशन (unclaimed redemption proceeds) की रकम ₹1,122 करोड़ रही।

आखिर क्यों रह जाता है पैसा अनक्लेम्ड?

इसका सबसे बड़ा कारण है एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) या रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (RTA) के पास निवेशकों के अपडेटेड रिकॉर्ड्स का न होना। जब कोई निवेशक अपना मोबाइल नंबर, ईमेल या बैंक अकाउंट बदले और फंड हाउस को इसकी जानकारी न दे, तो डिविडेंड या रिडेम्पशन का पैसा उन तक नहीं पहुंच पाता। समय के साथ यह राशि लावारिस जमा होती जाती है।

अन्य कारणों में फिजिकल सर्टिफिकेट्स में किए गए निवेश जिन्हें भुला दिया गया हो, पुरानी फोलियो जो अब ट्रैक नहीं हो रहे, या किसी निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनेशन डिटेल्स का स्पष्ट न होना शामिल है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के तेजी से बढ़ने और कुल फोलियो की संख्या 27.86 करोड़ से ज्यादा होने के कारण, इनएक्टिव या अनलिंक्ड खातों का छोटा सा हिस्सा भी बड़ी मात्रा में निष्क्रिय धन का कारण बन जाता है।

अपना पैसा कैसे ट्रैक करें और पाएं?

सेंट्रलाइज्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद से इस पैसे को वापस पाना अब आसान हो गया है। निवेशक MF Central की वेबसाइट पर जाकर MITRA (Mutual Fund Investment Tracing and Retrieval Assistant) टूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। CAMS और KFintech द्वारा विकसित यह प्लेटफॉर्म, व्यक्तियों को PAN, रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या जन्मतिथि का उपयोग करके विभिन्न फंड हाउसेस में लावारिस राशि और इनएक्टिव फोलियो की तलाश करने की सुविधा देता है।

इसके अलावा, निवेशक व्यक्तिगत AMC की वेबसाइट्स पर उपलब्ध 'Unclaimed Amounts' सेक्शन या CAMS और KFintech जैसे RTA पोर्टल्स पर भी जांच कर सकते हैं। NSDL और CDSL जैसे डिपॉजिटरी द्वारा जारी कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट्स (CAS) की समीक्षा करके भी किसी भी निष्क्रिय फोलियो की पहचान की जा सकती है।

क्लेम करने की प्रक्रिया

जब कोई निवेशक किसी विशेष फोलियो से जुड़ी लावारिस राशि की पहचान कर लेता है, तो उसे प्राप्त करने के लिए सभी व्यक्तिगत विवरणों को अपडेट रखना होगा। यदि निवेशक का KYC, बैंक खाता या संपर्क जानकारी बदली है, तो पहले उसे अपडेट कराना होगा। रिकॉर्ड अपडेट करने के बाद, AMC के इन्वेस्टर सर्विस सेंटर या RTA की ब्रांच में 'Release of Unclaimed Amount Form' या 'Common Transaction Slip' जमा करना होगा।

आमतौर पर मांगे जाने वाले दस्तावेजों में PAN, आधार की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी और वर्तमान बैंक खाते का प्रूफ, जैसे कैंसल्ड चेक शामिल होता है। यदि निवेशक की मृत्यु हो गई है, तो कानूनी वारिसों या नॉमिनी को मृत्यु प्रमाण पत्र के साथ ट्रांसमिशन रिक्वेस्ट (transmission request) जमा करनी होगी। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि मूल राशि क्लेम की जा सकती है, लेकिन SEBI के नियमों के अनुसार, तीन साल की अवधि के बाद इस फंड पर अर्जित किसी भी आय को निवेशक शिक्षा कोष (investor education fund) में ट्रांसफर कर दिया जाता है। KYC और नॉमिनेशन डिटेल्स को अपडेट रखना ही निवेशकों के लिए सबसे प्रभावी तरीका है ताकि उनका रिटर्न बिना किसी रुकावट के उनके बैंक खातों में पहुंच सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.