UTI ULIP का जलवा! 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न, पर लंबी अवधि में कहानी अलग

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
UTI ULIP का जलवा! 3 महीने में सबसे ज़्यादा रिटर्न, पर लंबी अवधि में कहानी अलग

UTI ULIP ने हाल ही में तीन महीने की अवधि में **5.1%** का शानदार रिटर्न दिया है, जिससे यह अपनी कैटेगरी में टॉप पर आ गया है। हालांकि, लंबी अवधि के आंकड़ों को देखें तो फंड की रैंकिंग में काफी बदलाव देखने को मिलता है।

क्या हुआ?

डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड कैटेगरी में UTI ULIP ने बाजी मारी है। 25 जून 2026 को खत्म हुई तीन महीने की अवधि में इस फंड ने 5.1% का रिटर्न दर्ज किया है। इस प्रदर्शन के साथ, इसने DSP डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड और Franklin India Balanced Advantage Fund जैसे फंड्स को पीछे छोड़ दिया है, जिन्होंने इसी अवधि में 4.4% का रिटर्न दिया था। यह जानकारी ACE MF के आंकड़ों से मिली है।

समय के साथ प्रदर्शन क्यों बदलता है?

भले ही UTI ULIP ने हालिया तीन महीने की अवधि में बढ़त हासिल की हो, लेकिन इस कैटेगरी में फंड्स की रैंकिंग समय सीमा के हिसाब से बदलती रहती है। अगर हम छह महीने की अवधि देखें, तो DSP डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड 0.7% के मुनाफे के साथ टॉप पर आ जाता है। यही नहीं, एक साल और तीन साल की अवधि में भी अलग-अलग फंड आगे निकल जाते हैं।

उदाहरण के लिए, DSP डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड ने लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। पिछले एक साल में इसने 4.6% का रिटर्न दिया है, जबकि पिछले तीन सालों में टॉप स्कीम्स में 11.0% का रिटर्न दर्ज किया गया है। यह दिखाता है कि कोई फंड किसी खास बाजार के दौर में अपनी खास रणनीति या एसेट मिक्स के कारण अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह लंबी अवधि में भी अपनी बढ़त बनाए रखे।

ये फंड्स कैसे काम करते हैं?

डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड, जिन्हें अक्सर बैलेंस्ड एडवांटेज फंड भी कहा जाता है, एक खास बिजनेस मॉडल पर काम करते हैं। इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि वे बाजार की मौजूदा स्थिति या एक तय गणितीय मॉडल के आधार पर अपने इक्विटी और डेट निवेश के बीच के मिश्रण को स्वचालित रूप से एडजस्ट करते हैं।

इनका लक्ष्य होता है कि जब बाजार बढ़ रहा हो तो इक्विटी में निवेश बढ़ाया जाए और जब बाजार अस्थिर या महंगा हो जाए तो डेट या कैश में निवेश बढ़ाया जाए। क्योंकि ये फंड बाजार को टाइम करने के लिए इन ऑटोमेटेड मॉडल पर निर्भर करते हैं, इनका प्रदर्शन इस बात पर काफी निर्भर करता है कि वह खास मॉडल कितना प्रभावी है। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि जो रणनीति साइडवेज या गिरते बाजार में अच्छा प्रदर्शन करती है, हो सकता है कि वह मजबूत तेजी वाले बाजार में वैसा प्रदर्शन न करे।

साइज का फैक्टर

जब इन फंड्स की तुलना की जाती है, तो निवेशक अक्सर मैनेजमेंट के तहत कुल पैसे यानी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को देखते हैं। इस कैटेगरी के टॉप पांच फंडों में, Edelweiss Balanced Advantage Fund सबसे बड़ा कॉर्पस यानी ₹12,908.9 करोड़ मैनेज करता है। हालांकि, बड़ा कॉर्पस बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं देता। निवेशकों को फंड के साइज पर अकेले ध्यान देने के बजाय फंड की कंसिस्टेंसी, उसके एसेट एलोकेशन मॉडल की पारदर्शिता और बाजार में गिरावट के दौरान जोखिम को मैनेज करने की उसकी ऐतिहासिक क्षमता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

इन फंड्स की समीक्षा करते समय, छोटी अवधि के रिटर्न से आगे देखना फायदेमंद होता है। निवेशकों को पिछले कुछ महीनों के बजाय तीन से पांच साल की अवधि में फंड के कंसिस्टेंट प्रदर्शन को ट्रैक करना चाहिए। यह समझना भी उपयोगी है कि फंड अपने बेंचमार्क की तुलना में कैसा प्रदर्शन कर रहा है, ताकि यह पता चल सके कि फंड मैनेजर कोई अतिरिक्त वैल्यू जोड़ रहा है या नहीं। एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) की निगरानी करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबी अवधि में ज्यादा फीस रिटर्न को कम कर सकती है। अंत में, फंड इक्विटी और डेट के बीच स्विच करने के लिए जो खास मॉडल इस्तेमाल करता है, उसे समझने से निवेशकों को यह तय करने में मदद मिल सकती है कि फंड की निवेश शैली उनकी अपनी जोखिम क्षमता के अनुरूप है या नहीं।

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