UTI ULIP Fund ने मारी बाजी: डायनामिक एसेट एलोकेशन में **2.6%** का शानदार रिटर्न!

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AuthorAditya Rao|Published at:
UTI ULIP Fund ने मारी बाजी: डायनामिक एसेट एलोकेशन में **2.6%** का शानदार रिटर्न!

UTI ULIP Fund ने डायनामिक एसेट एलोकेशन (Dynamic Asset Allocation) कैटेगरी के फंड्स में पिछले छह महीनों में सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस दिखाते हुए **2.6%** का रिटर्न दर्ज किया है। इस दौरान इसने Edelweiss और Mirae Asset जैसे बड़े फंड्स को भी पीछे छोड़ दिया।

Detailed Coverage

UTI ULIP Fund का दबदबा

Mutual Fund की दुनिया में UTI ULIP Fund ने पिछले छह महीनों में अपने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। 26 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने 2.6% का शानदार रिटर्न दिया है, जो इस कैटेगरी के अन्य बड़े फंड्स से काफी बेहतर है। डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड्स की खासियत ये है कि ये मार्केट की चाल के हिसाब से इक्विटी (Equity) और डेट (Debt) में अपना निवेश बदलते रहते हैं। इसी वजह से ये प्योर इक्विटी फंड्स के मुकाबले कम वोलेटाइल (Volatile) होते हैं और निवेशकों के बीच काफी पॉपुलर हैं।

टॉप परफॉर्मेंस, पीछे छूटे दिग्गज

पिछले छह महीनों के परफॉरमेंस चार्ट में UTI ULIP Fund के बाद Edelweiss Balanced Advantage Fund 1.9% रिटर्न के साथ दूसरे और Mirae Asset Balanced Advantage Fund 1.6% रिटर्न के साथ तीसरे नंबर पर रहे। हालांकि, इन फंड्स की रैंकिंग में बड़े फंड्स को ही शामिल किया गया है, जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) कम से कम ₹1,500 करोड़ हो। Edelweiss Balanced Advantage Fund, ₹13,031.2 करोड़ के AUM के साथ इस सेक्टर का सबसे बड़ा फंड है।

छोटे और बड़े समय के परफॉरमेंस में अंतर

सिर्फ छह महीनों का ही नहीं, बल्कि छोटे समय में भी UTI ULIP Fund ने अपना दम दिखाया है। पिछले एक महीने में इसने 1.1% और तीन महीनों में 4.2% का रिटर्न दिया है। वहीं, एक साल के दौरान फंड ने अपने बेंचमार्क (Benchmark) से 4.2% ज्यादा रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क खुद 4.1% नीचे गिरा था।

लेकिन, जब बात तीन साल की आती है, तो कहानी थोड़ी बदल जाती है। इस दौरान फंड अपने बेंचमार्क से 0.5% पीछे रहा, जहां बेंचमार्क ने 7.8% का रिटर्न दिया था। यह दिखाता है कि डायनामिक एसेट एलोकेशन फंड्स में फंड मैनेजर की स्ट्रैटेजी (Strategy) के हिसाब से परफॉरमेंस ऊपर-नीचे होती रहती है।

निवेशकों के लिए क्या है ज़रूरी?

अगर आप इन फंड्स में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सिर्फ शॉर्ट-टर्म के रिटर्न पर ही ध्यान न दें। ये फंड्स इक्विटी और बॉन्ड में बार-बार अपना निवेश बदलते हैं, इसलिए फंड मैनेजर के फैसले बहुत मायने रखते हैं।

निवेशकों को यह देखना चाहिए कि मार्केट में गिरावट के समय फंड अपने नुकसान को कितना कंट्रोल कर पाता है। अक्सर इन फंड्स का मकसद ग्रोथ के साथ-साथ वेल्थ (Wealth) को बचाना भी होता है। इसके अलावा, फंड का एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) और फंड मैनेजमेंट टीम का अलग-अलग मार्केट साइकल्स (Market Cycles) में पिछला रिकॉर्ड देखकर ही लंबी अवधि के लिए निवेश का फैसला करना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.