UTI Nifty 50 Index Fund ने पिछले 3 सालों में **8.9%** का सालाना रिटर्न देकर अपने साथियों को पीछे छोड़ दिया है। ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट वाले इंडेक्स फंड्स में यह सबसे आगे रहा। हालांकि, Navi और HDFC Nifty 50 Index Funds जैसे फंड्स भी नज़दीक थे, लेकिन मैनेजमेंट कॉस्ट और ट्रैकिंग के अंतर के कारण सभी इंडेक्स फंड्स आमतौर पर अपने बेंचमार्क से थोड़ा पीछे रह जाते हैं।
3 साल में सबसे आगे UTI Nifty 50 Index Fund
2 जुलाई 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, UTI Nifty 50 Index Fund ने Nifty 50 इंडेक्स फंड कैटेगरी में 3 साल के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) में 8.9% का शानदार रिटर्न देकर बाज़ी मारी है। यह रैंकिंग ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले बड़े फंड्स पर आधारित है। इस दौड़ में Navi Nifty 50 Index Fund और HDFC Nifty 50 Index Fund जैसे फंड्स भी पीछे नहीं थे, जिन्होंने समान अवधि में 8.8% का रिटर्न दर्ज किया।
AUM का बड़ा फायदा
₹27,826.9 करोड़ के कुल कॉर्पस के साथ, UTI Nifty 50 Index Fund का साइज़ अपने कई साथियों की तुलना में काफी बड़ा है। निवेशक अक्सर इंडेक्स फंड के साइज़ पर गौर करते हैं क्योंकि ज़्यादा एसेट्स होने से खर्चों को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, फंड का प्रदर्शन मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि वह अपने टारगेट इंडेक्स को कितनी बारीकी से ट्रैक करता है।
ट्रैकिंग डिफरेंस और परफॉरमेंस गैप
भले ही फंड अपने साथियों से आगे है, लेकिन निवेशकों के लिए यह समझना ज़रूरी है कि इंडेक्स फंड्स स्वाभाविक रूप से अपने बेंचमार्क इंडेक्स से थोड़ा कम प्रदर्शन करते हैं। इस अंतर को 'ट्रैकिंग डिफरेंस' कहा जाता है, जो फंड के मैनेजमेंट फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चों और ट्रांजैक्शन कॉस्ट जैसे खर्चों के कारण होता है, जबकि इंडेक्स पर ऐसे खर्च नहीं होते। इस मामले में, UTI Nifty 50 Index Fund 3 साल के आधार पर बेंचमार्क इंडेक्स से 0.4% पीछे रहा, क्योंकि Nifty 50 बेंचमार्क ने 9.2% का रिटर्न दिया था। पिछले एक साल में भी फंड बेंचमार्क से 0.3% पीछे रहा।
छोटी अवधि के रुझान
3 साल की अवधि से आगे देखें तो, फंड ने छोटी अवधि में भी अच्छी गति दिखाई है। पिछले एक महीने में इसने 3.2% का रिटर्न दिया, जबकि 3 महीने में यह 6.9% रहा। हालांकि, पिछले एक साल में फंड ने -4.2% का नेगेटिव एब्सोल्यूट रिटर्न दिया, लेकिन मुश्किल बाज़ार के दौर में भी यह अपने कैटेगरी के कई फंड्स से बेहतर प्रदर्शन था।
इंडेक्स फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को एब्सोल्यूट रिटर्न के साथ-साथ एक्सपेंस रेश्यो (expense ratio) और ट्रैकिंग एरर (tracking error) पर भी ध्यान देना चाहिए। कम ट्रैकिंग एरर का मतलब है कि फंड बेंचमार्क को ज़्यादा प्रभावी ढंग से कॉपी कर रहा है, जो किसी भी पैसिव इंडेक्स फंड का मुख्य लक्ष्य होता है। फंड के सेमी-एन्युअल एक्सपेंस रेश्यो के डिस्क्लोजर और बाज़ार की बदलती परिस्थितियों के साथ ट्रैकिंग एरर में होने वाले बदलावों पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।
