UTI Floater Fund ने फ्लोटिंग-रेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में पिछले 1 महीने में **0.5%** का दमदार रिटर्न देकर अपने साथियों को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, निवेशकों को सिर्फ एक महीने के प्रदर्शन पर ध्यान नहीं देना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग फंड एक साल और तीन साल की अवधि में बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
UTI फ्लोटर फंड का एक महीने का जलवा
UTI Floater Fund एक महीने की अवधि (29 जुलाई, 2026 तक) में फ्लोटिंग-रेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे अव्वल रहा है। डेटा के मुताबिक, इस फंड ने 0.5% का रिटर्न दिया, जो आदित्य बिड़ला एसएल फ्लोटिंग रेट फंड और कोटक फ्लोटिंग रेट फंड से बेहतर है। इन दोनों फंड्स ने इसी अवधि में 0.4% का रिटर्न दर्ज किया था। यह तुलना उन बड़े फंड्स पर केंद्रित है जिनकी असेट्स कम से कम ₹1,500 करोड़ है।
अलग-अलग समय-सीमाओं पर प्रदर्शन को समझें
जहां एक ओर छोटी अवधि का प्रदर्शन हाल की सफलता को दिखाता है, वहीं लंबी अवधि में म्यूचुअल फंड की रैंकिंग काफी बदल सकती है। उदाहरण के लिए, जहां UTI Floater Fund एक महीने के लिए सबसे आगे है, वहीं कुछ अन्य फंड्स ने लंबी अवधि में मजबूत प्रदर्शन किया है। आईसीआईसीआई प्रू फ्लोटिंग इंटरेस्ट फंड ने छह महीने में 3.4% और एक साल में 6.2% का रिटर्न देकर मध्य से लंबी अवधि में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है। वहीं, कोटक फ्लोटिंग रेट फंड ने तीन साल की अवधि में 7.5% का रिटर्न देते हुए पहला स्थान हासिल किया है।
फ्लोटिंग-रेट फंड्स के लिए निवेशक की सोच
फ्लोटिंग-रेट फंड मुख्य रूप से ऐसे डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) में निवेश करते हैं जिनकी ब्याज दरें बदलती रहती हैं। ये फंड ऐसे माहौल में फायदेमंद होते हैं जहां ब्याज दरें बढ़ रही हों, क्योंकि उनके बॉन्ड होल्डिंग्स पर मिलने वाला कूपन (Coupon) समय-समय पर रीसेट होता रहता है। हालांकि, इनका प्रदर्शन क्रेडिट क्वालिटी, ब्याज दर की अस्थिरता और डेट पोर्टफोलियो की संरचना पर निर्भर करता है।
इन फंड्स का मूल्यांकन करने वाले निवेशकों को सिर्फ एक महीने के प्रदर्शन से आगे देखना चाहिए। यह महत्वपूर्ण है कि फंड के रिटर्न की तुलना उसके बेंचमार्क (Benchmark) से की जाए और फंड के जोखिम प्रोफाइल का आकलन किया जाए, जिसमें उसकी होल्डिंग्स की औसत मैच्योरिटी (Average Maturity) और पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों की क्रेडिट क्वालिटी शामिल हो। आदित्य बिड़ला एसएल फ्लोटिंग रेट फंड जैसे बड़े फंड, जिनका कॉर्पस ₹13,519.3 करोड़ है, छोटे फंड्स की तुलना में अलग लिक्विडिटी प्रोफाइल (Liquidity Profile) पेश कर सकते हैं। यह समझना ज़रूरी है कि कोई फंड विभिन्न ब्याज दर चक्रों में ड्यूरेशन (Duration) और क्रेडिट रिस्क (Credit Risk) का प्रबंधन कैसे करता है, ताकि निवेश को व्यक्तिगत वित्तीय लक्ष्यों और समय-सीमाओं के साथ संरेखित किया जा सके।
