ICICI Prudential, SBI और Nippon India Mutual Fund ने साल 2026 के IPO में **₹12,944 करोड़** का दांव लगाया है। ये कंपनियां कुल इंस्टीट्यूशनल एलोकेशन का **52%** हिस्सा संभाल रही हैं, जिससे नए लिस्टिंग के वैल्युएशन पर इनका सीधा असर दिख रहा है।
भारतीय प्राइमरी मार्केट (Primary Market) में इस वक्त तीन बड़े नामों का बोलबाला है। ICICI Prudential Mutual Fund, SBI Mutual Fund और Nippon India Mutual Fund ने इस साल आए IPOs में जमकर पैसा झोंका है। इनके निवेश का कुल आंकड़ा ₹12,944 करोड़ पहुंच चुका है, जो कुल इंस्टीट्यूशनल एलोकेशन का 52% है।
कैसे काम कर रहे हैं ये 'वैल्यूएशन एंकर'?
इस पैसे की ताकत से मार्केट में एक अलग तरह का 'टू-टियर सिस्टम' बन गया है। बड़े फंड हाउस अब IPOs के वैल्युएशन तय करने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। ICICI Prudential ने 13 अलग-अलग लिस्टिंग्स में पैसा लगाया है, जबकि SBI ने अपनी रणनीति को 6 कंपनियों पर सीमित रखा है, जिससे वे इन फर्मों में 3.8% की हिस्सेदारी हासिल कर पाए हैं। ये फंड Shadowfax, Amagi, Omnitech और Sedemac Mechatronics जैसे बड़े IPOs के लिए 'एंकर' की भूमिका निभा रहे हैं।
रिटेल निवेशकों के लिए रिस्क और अलर्ट
इन बड़े प्लेयर्स का भारी निवेश नए IPOs को एक मजबूती तो देता है, लेकिन इसके साथ कुछ बड़े रिस्क भी जुड़े हैं। कभी-कभी IPOs का वैल्युएशन फंड हाउस की मांग पर निर्भर करता है, न कि कंपनी के असली फंडामेंटल्स (Fundamentals) पर। उदाहरण के तौर पर, Amagi जैसी कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी और EBITDA मार्जिन को लेकर मार्केट में पहले ही सवाल उठ चुके हैं।
इसके अलावा, 'एंकर लॉक-इन' का दौर खत्म होने पर निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। इन निवेशकों को 90 दिन तक शेयर होल्ड करने होते हैं। जब यह समय सीमा खत्म होती है, तो पोर्टफोलियो रीबैलेंसिंग के चलते बिकवाली का दबाव बन सकता है। रिटेल निवेशकों को चाहिए कि वे इन कंपनियों की तिमाही नतीजों पर नजर रखें, ताकि यह पता चल सके कि क्या उनका करंट वैल्युएशन वाकई जायज है या नहीं।
