Tata Retirement Savings Fund: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 'प्रोग्रेसिव प्लान' ने मारी बाजी, शानदार रिटर्न

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tata Retirement Savings Fund: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 'प्रोग्रेसिव प्लान' ने मारी बाजी, शानदार रिटर्न

टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड का 'प्रोग्रेसिव प्लान' इक्विटी-उन्मुख रिटायरमेंट फंड कैटेगरी में सबसे आगे निकल गया है। इसने पिछले तीन महीनों में **4.5%** का रिटर्न दिया है, जो इसके प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर है। हालांकि, निवेशकों को इस अच्छे रिटर्न के साथ 'बहुत ज़्यादा' रिस्क प्रोफाइल को भी ध्यान में रखना होगा।

शानदार परफॉर्मेंस से 'प्रोग्रेसिव प्लान' सबसे आगे

हालिया आंकड़ों के अनुसार, टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड का 'प्रोग्रेसिव प्लान' इक्विटी-उन्मुख रिटायरमेंट फंड कैटेगरी में टॉप परफॉर्मर बनकर उभरा है। इस स्कीम ने पिछले तीन महीनों में 4.5% का शानदार रिटर्न दिया है, जो इसे एसबीआई रिटायरमेंट बेनिफिट फंड-एग्रेसिव प्लान (जिसने 4.1% रिटर्न दिया) और टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड - मॉडरेट प्लान (जिसने 4.0% रिटर्न दिया) जैसे प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे रखता है।

लंबी अवधि में भी दमदारी

सिर्फ छोटी अवधि का प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि में भी इस फंड ने अपनी काबिलियत साबित की है। इसने एक साल और तीन साल के समय में अपने बेंचमार्क को काफी पीछे छोड़ा है। उदाहरण के लिए, तीन साल की अवधि में फंड ने 13.4% का रिटर्न दिया, जो इसके बेंचमार्क से कहीं बेहतर है। यह दिखाता है कि फंड की रणनीति मध्यम से लंबी अवधि में बाजार की चाल को समझने में कामयाब रही है।

रिस्क प्रोफाइल को समझना ज़रूरी

निवेशकों को यह समझना चाहिए कि इक्विटी-उन्मुख रिटायरमेंट फंड, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक, कम जोखिम वाले सेविंग्स इंस्ट्रूमेंट्स से अलग होते हैं। टाटा रिटायरमेंट सेविंग्स फंड - प्रोग्रेसिव प्लान का रिस्क प्रोफाइल 'बहुत ज़्यादा' है। चूंकि ये फंड मुख्य रूप से शेयर बाजार में निवेश करते हैं, इसलिए बाजार की अस्थिरता के आधार पर निवेश का मूल्य काफी ऊपर-नीचे हो सकता है। यह फंड उन निवेशकों के लिए ज़्यादा उपयुक्त है जिनका नजरिया लंबा है और जो बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव को झेल सकते हैं।

प्रतिद्वंद्वियों से तुलना

रिटायरमेंट फंड का मूल्यांकन करते समय, फंड का आकार और पैमाना अक्सर महत्वपूर्ण कारक होते हैं। जहां टाटा प्रोग्रेसिव प्लान ने हालिया रिटर्न में बढ़त हासिल की है, वहीं एसबीआई रिटायरमेंट बेनिफिट फंड-एग्रेसिव प्लान जैसे प्रतिद्वंद्वियों के पास ₹3,100 करोड़ से ज़्यादा का बड़ा कॉर्पस है। इन विकल्पों की तुलना करने वाले निवेशक अक्सर सिर्फ हालिया प्रतिशत रिटर्न से परे देखते हैं, जैसे कि फंड हाउस का ट्रैक रिकॉर्ड, निवेश रणनीति की स्थिरता और बाजार में गिरावट के दौरान फंड की अस्थिरता का प्रबंधन।

रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए ज़रूरी बातें

रिटायरमेंट प्लानिंग में बाजार की अस्थिरता से परे जोखिमों पर ध्यान देना होता है। निवेशकों को महंगाई के जोखिम का सामना करना पड़ता है, जो समय के साथ उनकी क्रय शक्ति को कम कर सकती है। इसका मतलब है कि अगर उनकी बचत बहुत धीरे-धीरे बढ़ती है, तो वह भविष्य की लागतों को पूरा नहीं कर पाएगी। 'सीक्वेंस-ऑफ-रिटर्न्स' का जोखिम भी है, जहां रिटायरमेंट के करीब एक बड़ी बाजार गिरावट से कुल कॉर्पस के आकार पर असर पड़ सकता है।

इस कैटेगरी में निवेशकों के लिए मुख्य बात तीन महीने का प्रदर्शन नहीं, बल्कि फंड की लंबी अवधि में जोखिम का प्रबंधन करते हुए अपनी बढ़त बनाए रखने की क्षमता है। चूंकि ये इक्विटी-हैवी स्कीमें हैं, इसलिए विभिन्न बाजार चक्रों में लगातार प्रदर्शन आवश्यक है। निवेशकों को यह आकलन करना चाहिए कि क्या वर्तमान रणनीति उनकी उम्र, जोखिम सहनशीलता और रिटायरमेंट लक्ष्य तक शेष समय के साथ मेल खाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.