Tata ELSS SIP: ₹1 करोड़ का आंकड़ा पार, पर कम रिटर्न ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता!

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Tata ELSS SIP: ₹1 करोड़ का आंकड़ा पार, पर कम रिटर्न ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता!
Overview

Tata ELSS Fund में **₹10,000** की मंथली SIP ने **20 साल** में **₹1 करोड़** से ज्यादा का आंकड़ा पार कर लिया है, जिसने **13.2%** का सालाना रिटर्न दिया है। लेकिन, फंड के हालिया प्रदर्शन और दूसरे ELSS फंड्स के मुकाबले पिछड़ने को लेकर चिंता जताई जा रही है।

SIP की ₹1 करोड़ की माइलस्टोन, पर सवालों के घेरे में प्रदर्शन

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए वेल्थ बनाने की कहानी अक्सर कमाल की होती है, और Tata ELSS Fund के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है। ₹10,000 की मंथली SIP ने 20 सालों में ₹1.06 करोड़ की रकम जमा कर ली है, जो निवेश की गई ₹24 लाख की कुल रकम पर लगभग 13.2% का सालाना रिटर्न दिखाता है। यह लगातार निवेश और रुपया-कॉस्ट एवरेजिंग (Rupee-Cost Averaging) की ताकत को दर्शाता है।

प्रदर्शन के आंकड़े चिंताजनक?

हालांकि, जब हम फंड के मौजूदा प्रदर्शन और बाजार के दूसरे डेटा पर नजर डालते हैं, तो तस्वीर थोड़ी अलग दिखती है। 25 मार्च 2026 तक ₹48.91 के नेट एसेट वैल्यू (NAV) वाले Tata ELSS Fund ने पिछले 1 साल में सिर्फ 2.1% का रिटर्न दिया है। वहीं, इसके 3 साल के रिटर्न में 16.01% और 5 साल के रिटर्न में 13.97% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कॉम्पिटीटर्स से पिछड़ रहा फंड

असली चिंता तब बढ़ जाती है जब हम इसकी तुलना दूसरे ELSS फंड्स और बेंचमार्क से करते हैं। Quant ELSS Tax Saver Fund जैसे टॉप फंड्स ने जहां 3-5 साल में 31.08% तक का शानदार रिटर्न दिया है, वहीं Motilal Oswal ELSS Tax Saver Fund ने भी 21.55% तक का रिटर्न कमाया है। Nifty 500 TRI जैसे बेंचमार्क ने भी 3 साल में 12.30% से 20.28% और 5 साल में 17.14% से 17.66% का रिटर्न दिया है। इन सबके मुकाबले Tata ELSS Fund पिछड़ता दिख रहा है।

AUM और एक्सपेंस रेश्यो पर भी नजर

Tata ELSS Fund का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगभग ₹4,674 करोड़ है, लेकिन इसका एक्सपेंस रेश्यो लगभग 1.83% है, जो कई कॉम्पिटीटर्स से ज्यादा है और लॉन्ग-टर्म रिटर्न को कम कर सकता है।

इक्विटी के जोखिम और लॉक-इन की हकीकत

यह फंड टैक्स बचाने वाली स्कीम (ELSS) है, जिसमें इक्विटी का रिस्क हमेशा बना रहता है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि पुराने रिटर्न को देखकर भविष्य के अनुमान नहीं लगाने चाहिए। ये फंड मार्केट की वोलैटिलिटी (Volatility) के अधीन होते हैं, यानी इनकी वैल्यू काफी ऊपर-नीचे हो सकती है। साथ ही, 3 साल का लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period) भी एक अहम फैक्टर है, जो फंड को इस्तेमाल करने पर रोक लगाता है।

टैक्स बचत के साथ रिटर्न की भी है जरूरत

ELSS का मुख्य फायदा सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाना है। लेकिन, बदलते टैक्स नियमों और दूसरे निवेश विकल्पों को देखते हुए, यह देखना जरूरी है कि क्या सिर्फ टैक्स बचाने के लिए इक्विटी का रिस्क उठाना और कम रिटर्न को स्वीकार करना समझदारी है।

आगे की राह: सही फंड का चुनाव

SIP वेल्थ बनाने का एक बेहतरीन जरिया है, लेकिन फंड का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। निवेशकों को सिर्फ ₹1 करोड़ के आंकड़े पर नहीं, बल्कि फंड के मौजूदा प्रदर्शन, एक्सपेंस रेश्यो, रिस्क और अपने फाइनेंशियल गोल्स पर ध्यान देना चाहिए। अलग-अलग एसेट क्लास में डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) और अपने निवेश की नियमित समीक्षा लॉन्ग-टर्म वेल्थ बनाने के लिए जरूरी है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.