निवेशक अक्सर सुरक्षित रहने के चक्कर में बहुत सारे Mutual Funds खरीद लेते हैं, जिससे उन्हें लगता है कि उनका रिस्क कम हो गया है। लेकिन असल में, पोर्टफोलियो में ओवरलैप (Overlap) बढ़ने से खर्च बढ़ते हैं और रिटर्न पर बुरा असर पड़ता है।
पोर्टफोलियो ओवरलैप की समस्या
बहुत सारे फंड्स रखने का सबसे बड़ा नुकसान 'हिडन ओवरलैप' है। अगर आपके पास कई लार्ज-कैप (Large-cap) या फ्लेक्सी-कैप (Flexi-cap) फंड्स हैं, तो संभावना है कि ये सभी फंड्स एक ही 20 से 30 स्टॉक्स में पैसा लगा रहे होंगे। जब आपका पूरा निवेश एक ही तरह के शेयर्स में फंस जाता है, तो डाइवर्सिफिकेशन का असली फायदा खत्म हो जाता है। अगर वे सेक्टर गिरते हैं, तो आपका पूरा पोर्टफोलियो एक साथ डूब जाता है।
एक्टिव फीस बनाम पैसिव रिटर्न
कई फंड्स रखने पर आप अनजाने में 'क्लोजेट इंडेक्सिंग' (Closet Indexing) का शिकार हो जाते हैं। आप फंड मैनेजर को हाई एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) के तौर पर मोटी फीस देते हैं, लेकिन फंड का परफॉर्मेंस किसी सस्ते इंडेक्स फंड जैसा ही होता है। यानी आप ज्यादा फीस देकर कम रिटर्न पाने का रिस्क मोल ले रहे हैं।
स्टार रेटिंग्स के जाल से बचें
ज्यादातर निवेशक पिछले 3 साल के रिकॉर्ड या 'स्टार रेटिंग' देखकर पैसा लगा देते हैं। यह एक बड़ी गलती है, क्योंकि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होता। अच्छी वेल्थ क्रिएशन के लिए जरूरी है कि आप फंड के अंदर की एसेट एलोकेशन और मैनेजर की स्टाइल को समझें, न कि केवल रैंकिंग पर ध्यान दें।
निवेश में जड़ता (Investment Inertia) से बाहर निकलें
कई बार निवेशक किसी खराब फंड से इसलिए नहीं निकलते क्योंकि उन्हें एग्जिट लोड या टैक्स का डर होता है। किसी अंडरपरफॉर्मिंग एसेट को केवल टैक्स बचाने के लिए अपने पास रखना आपकी लॉन्ग-टर्म वेल्थ को नुकसान पहुंचाता है। नियमित रूप से पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और खराब फंड्स को हटाना बेहतर होता है।
सरलता ही सफलता की कुंजी है
एक साफ-सुथरा और छोटा पोर्टफोलियो मैनेज करना आसान होता है। 10 अलग-अलग स्टेटमेंट्स ट्रैक करने के बजाय, कुछ चुनिंदा और रिसर्च किए हुए फंड्स में निवेश करना आपको मार्केट के उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से संभालने और अपने फाइनेंशियल गोल्स को हासिल करने में मदद करता है।
