स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। 30 सितंबर, 2026 तक इनका कुल AUM **₹38,224 करोड़** के पार पहुंच गया है। अप्रैल 2025 में लॉन्च हुए इन फंड्स में निवेश के लिए **₹10 लाख** की मिनिमम लिमिट तय की गई है।
बाजार में क्या है हलचल?
भारतीय एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) का क्रेज बढ़ता जा रहा है। SEBI द्वारा 1 अप्रैल, 2025 को पेश की गई इस कैटेगरी ने महज डेढ़ साल में ₹38,224 करोड़ का एसेट बेस खड़ा कर लिया है। यह फंड्स उन निवेशकों के लिए हैं जो पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स की सीमाओं से आगे निकलकर कुछ अलग ढूंढ रहे हैं।
क्यों खास हैं ये फंड्स?
SIF को म्यूचुअल फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के बीच की एक कड़ी के रूप में लाया गया है। इसमें फंड मैनेजर्स को लंबी अवधि के लिए लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी स्ट्रेटजी और डेरिवेटिव आधारित हेजिंग (Hedging) जैसे जटिल टूल्स इस्तेमाल करने की आजादी मिलती है। हाई-नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) के बीच इसकी लोकप्रियता की एक वजह यह लचीलापन भी है।
किसका है दबदबा?
वर्तमान में इस सेगमेंट में Edelweiss AMC सबसे आगे है। उनके Altiva प्लेटफॉर्म के पास अकेले ₹13,221 करोड़ का मैनेजमेंट है, जो पूरे इंडस्ट्री का करीब 34% है। आंकड़ों पर नजर डालें तो टॉप 5 प्लेयर्स के पास कुल एसेट्स का 83% हिस्सा है, जो मार्केट में इनके वर्चस्व को दिखाता है।
निवेश से पहले रिस्क को समझें
हालांकि फंड्स तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि ये सामान्य म्यूचुअल फंड्स से अलग हैं। यह फंड्स जटिल डेरिवेटिव्स का सहारा लेते हैं, इसलिए इनका परफॉर्मेंस बेंचमार्क इंडेक्स से काफी अलग हो सकता है। चूंकि यह कैटेगरी अभी 2 साल से भी कम पुरानी है, इसलिए मार्केट के विभिन्न साइकल्स में इनका लंबा ट्रैक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन्हें अपनी बचत का मुख्य हिस्सा बनाने के बजाय, एक स्ट्रैटेजिक टूल की तरह देखना चाहिए।
