भारत में Specialised Investment Funds (SIFs) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। अक्टूबर 2025 में महज ₹2,010 करोड़ से शुरू हुआ इसका AUM जुलाई 2026 तक बढ़कर ₹23,177 करोड़ पहुंच गया है। कम से कम ₹10 लाख का निवेश चाहने वाले निवेशकों के लिए ये फंड्स खास रणनीति पेश करते हैं, लेकिन इनमें जोखिम भी अधिक है।
भारतीय निवेश बाजार में Specialised Investment Funds (SIFs) एक नई ताकत बनकर उभरे हैं। अक्टूबर 2025 में लॉन्च होने के बाद से, इस कैटेगरी ने निवेशकों के बीच अपनी एक अलग जगह बना ली है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो सामान्य म्यूचुअल फंड से ऊपर उठकर कुछ नया और एडवांस्ड तलाश रहे हैं, लेकिन जो PMS (Portfolio Management Services) की अत्यधिक महंगी टिकट साइज में नहीं जाना चाहते।
एसेट मैनेजमेंट में नई क्रांति
SEBI ने SIF कैटेगरी को इसलिए पेश किया था ताकि एक रेगुलेटेड ढांचे के भीतर स्ट्रेटेजी-ड्रिवेन निवेश के मौके मिल सकें। पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स के उलट, SIFs फंड मैनेजरों को डेरिवेटिव्स, शॉर्ट पोजीशंस और एक्टिव सेक्टर रोटेशन जैसे टूल्स इस्तेमाल करने की पूरी आजादी देते हैं।
वर्तमान में, Edelweiss, ICICI Prudential, और SBI Mutual Fund जैसे बड़े नाम इस स्पेस में अपनी धाक जमाए हुए हैं। निवेशकों की आसानी के लिए, रेगुलेटर ने जुलाई 2026 में डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए एक कॉमन सर्टिफिकेशन एग्जाम भी अनिवार्य कर दिया है, ताकि इस कैटेगरी में पारदर्शिता और प्रोफेशनल सलाह बढ़ सके।
रिस्क और निवेश की रणनीति
SIFs की सबसे लोकप्रिय रणनीति 'हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट' (Hybrid Long-Short) है। इसमें फंड मैनेजर उन शेयरों को खरीदता है जिनमें तेजी की उम्मीद होती है, जबकि उन्हीं शेयरों को शॉर्ट (Short) भी करता है जिनमें गिरावट की आशंका होती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान भी रिटर्न बनाने की कोशिश की जाती है।
हालांकि, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि यह कैटेगरी आम ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड से काफी अलग है। डेरिवेटिव्स और डायनामिक एसेट एलोकेशन के कारण इनमें जोखिम अधिक होता है। साथ ही, लिक्विडिटी और काउंटरपार्टी रिस्क की संभावना भी बनी रहती है।
निवेशकों के लिए सलाह
अगर आप SIF में निवेश की सोच रहे हैं, तो फंड हाउस का ट्रैक रिकॉर्ड देखना सबसे जरूरी है। यह निवेश केवल मार्केट की चाल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि फंड मैनेजर की एक्टिव रणनीति पर टिकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि SIF को इंडेक्स फंड या लॉन्ग-टर्म इक्विटी फंड्स का विकल्प न समझें, बल्कि इसे एक ऐसी रणनीति के रूप में देखें जो मार्केट के अलग-अलग साइकल में रिस्क को मैनेज करने के लिए बनाई गई है।
