स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स में SIP के जरिए निवेश 5 गुना बढ़कर ₹1.83 ट्रिलियन हो गया है। यह मार्च 2021 के ₹35,489 करोड़ से काफी ज्यादा है। यह दिखाता है कि रिटेल निवेशक इस सेगमेंट में कितनी दिलचस्पी दिखा रहे हैं, लेकिन उन्हें इसके जोखिमों के बारे में भी पता होना चाहिए।
स्मॉलकैप फंड्स में SIP का जलवा
भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड्स, खासकर SIP रूट से, अब पहली पसंद बन गए हैं। मार्च 2026 तक, स्मॉलकैप कैटेगरी में SIP से जुड़ी कुल संपत्ति (AUM) ₹1.83 ट्रिलियन के आंकड़े पर पहुंच गई। यह मार्च 2021 में महज ₹35,489 करोड़ थी। पिछले 5 सालों में यह 5 गुना की भारी बढ़ोतरी निवेशकों के बदलते रुझान को दिखाती है, जो अब हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड वाले सेगमेंट की ओर बढ़ रहे हैं।
स्मॉलकैप पोर्टफोलियो में SIP का बढ़ता दखल
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (Amfi) के आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी मार्केट में स्मॉलकैप फंड्स की एक खास जगह है। मार्च 2026 तक, इस कैटेगरी के कुल AUM का 55% हिस्सा SIP से जुड़ा था, जो सभी इक्विटी फंड्स में सबसे ज्यादा है। इससे पता चलता है कि निवेशक सिर्फ स्मॉलकैप्स को चुन ही नहीं रहे, बल्कि बड़ी एकमुश्त रकम के बजाय छोटी-छोटी मासिक किस्तों के जरिए लगातार अपनी पोजीशन बना रहे हैं।
इस ग्रोथ ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के परिदृश्य को भी बदला है। स्मॉलकैप फंड्स अब इंडस्ट्री के कुल SIP AUM का 12.1% हिस्सा रखते हैं, जो 2021 में सिर्फ 8.3% था। सिर्फ जुलाई 2026 में ही, स्मॉलकैप फंड्स ने ₹7,768 करोड़ का नेट इनफ्लो आकर्षित किया, जो इस सेगमेंट की अस्थिरता के बावजूद निवेशकों की मजबूत रुचि को दर्शाता है।
स्मॉलकैप की अस्थिरता के जोखिमों को समझना
SIP एसेट्स में यह बढ़ोतरी इस सेगमेंट की ऐतिहासिक क्षमता में निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है, लेकिन इसके साथ कुछ खास जोखिम भी जुड़े हैं जिन्हें समझना जरूरी है। स्मॉलकैप स्टॉक्स अपनी प्रकृति के कारण कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। बाजार में गिरावट के दौरान, ये स्टॉक्स बड़ी, स्थापित कंपनियों की तुलना में ज्यादा गिर सकते हैं।
एक और महत्वपूर्ण पहलू है लिक्विडिटी का जोखिम। स्मॉलकैप कंपनियों में अक्सर ट्रेडिंग वॉल्यूम कम होता है। इसका मतलब है कि अगर किसी फंड मैनेजर को बाजार में अचानक घबराहट के दौरान बड़ी मात्रा में शेयर बेचने की जरूरत पड़ती है, तो फंड की कीमत पर नकारात्मक प्रभाव डाले बिना ऐसा करना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा, जब सीमित संख्या में स्मॉलकैप स्टॉक्स में बहुत अधिक पैसा डाला जाता है, तो यह वैल्यूएशन को महंगा बना सकता है। यदि कीमतें इन छोटी कंपनियों के वास्तविक बिजनेस प्रदर्शन से अलग हो जाती हैं, तो भविष्य में खराब प्रदर्शन का जोखिम बढ़ जाता है। निवेशक अक्सर पिछले रिटर्न का पीछा करते हैं, लेकिन यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि अतीत के उच्च रिटर्न भविष्य में समान रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं।
जो लोग स्मॉलकैप SIP में निवेशित हैं या विचार कर रहे हैं, उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है लंबी अवधि का नजरिया बनाए रखना। इस सेगमेंट की अंतर्निहित अस्थिरता का मतलब है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो के मूल्य में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। SIP रणनीति की सफलता बाजार के सभी चक्रों में अनुशासित निवेश पर निर्भर करती है, न कि अल्पकालिक मूल्य आंदोलनों पर प्रतिक्रिया करने या बाजार को टाइम करने की कोशिश पर।
