सितंबर के महीने में मार्केट में आई गिरावट के बावजूद रिटेल निवेशकों ने Small-cap म्युचुअल फंड्स में **₹9,038.57 करोड़** का भारी निवेश किया है। भले ही Nifty Smallcap 250 इंडेक्स **3.12%** नीचे लुढ़का, लेकिन निवेशकों ने लंबी अवधि के नजरिए से अपना निवेश जारी रखा है।
सितंबर महीने में रिटेल निवेशकों ने स्मॉल-कैप फंड्स पर अपना दांव जारी रखा। अगस्त के मुकाबले इसमें 13.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। निवेशकों का यह रुझान बताता है कि वे मार्केट के उतार-चढ़ाव से डरे बिना SIP के जरिए पैसा लगा रहे हैं।
अलग-अलग फंड्स की अलग रणनीति
फंड मैनेजर्स मौजूदा मार्केट माहौल को संभालने के लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। Bandhan Small Cap Fund ने सबसे अधिक ₹2,191 करोड़ का निवेश आकर्षित किया। इनका पोर्टफोलियो 261 स्टॉक्स के साथ काफी डायवर्सिफाइड है और इन्होंने 13% एसेट्स कैश के रूप में बचाकर रखे हैं, जिससे इन्हें इंडेक्स के मुकाबले कम 1.50% की गिरावट झेलनी पड़ी।
इसके उलट, Invesco India Smallcap Fund ने 75 स्टॉक्स के साथ ज्यादा कंसंट्रेटेड अप्रोच अपनाई है, जहां टॉप 10 बेट्स में ही 34% पैसा लगा है। इस रणनीति के कारण फंड में ज्यादा वोलाटिलिटी दिखी और इसे 3.78% की गिरावट का सामना करना पड़ा।
वहीं, देश के सबसे बड़े फंड Nippon India Small Cap Fund का AUM ₹80,906 करोड़ है। इसमें ₹750 करोड़ का नया निवेश आया, लेकिन मार्केट ट्रेंड के अनुरूप यह 2.94% नीचे रहा।
रिस्क और निवेशकों के लिए जरूरी बातें
स्मॉल-कैप कैटेगरी में रिस्क हमेशा बना रहता है। बाजार में तनाव के समय लिक्विडिटी का संकट हो सकता है, जिससे शेयरों को बिना किसी बड़े नुकसान के बेचना मुश्किल हो जाता है। इन चिंताओं को देखते हुए, SEBI ने अब इन फंड्स के लिए स्ट्रेस टेस्ट अनिवार्य कर दिया है, ताकि रिडेम्पशन के समय निवेशकों को दिक्कत न हो। निवेशकों को सलाह है कि वे शॉर्ट-टर्म परफॉर्मेंस की जगह लंबी अवधि के गोल्स पर फोकस रखें।
