अगस्त 2026 में स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है, जबकि लार्ज-कैप फंड्स से निकासी देखी गई है। हालांकि, अलग-अलग फंड मैनेजरों की रणनीतियां बहुत अलग हैं, जो निवेशकों के लिए रिस्क का स्तर बदल देती हैं।
अगस्त 2026 में स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड्स के प्रति निवेशकों का आकर्षण बरकरार रहा और इस कैटेगरी में कुल ₹7,973 करोड़ का नेट इनफ्लो आया। यह ट्रेंड लार्ज-कैप फंड्स से बिल्कुल उलट है, जहां लगातार दूसरे महीने निवेशकों ने पैसा निकाला है। साफ है कि बाजार की उठापटक के बावजूद रिटेल निवेशकों का भरोसा छोटी कंपनियों में बना हुआ है।
फंड मैनेजरों की अलग-अलग स्ट्रैटेजी
बड़ी पूंजी संभालने वाले फंड मैनेजर इन पैसों को मैनेज करने के लिए अलग-अलग रास्ते अपना रहे हैं। कोई कैश रिजर्व को हथियार बना रहा है, तो कोई कम शेयरों में दांव लगाकर ग्रोथ की तलाश में है।
Bandhan Small Cap Fund: मनीष गुनवानी द्वारा मैनेज किए जा रहे इस फंड ने हाई डाइवर्सिफिकेशन का रास्ता चुना है। ₹34,176 करोड़ के एसेट बेस (AUM) वाले इस फंड में 258 स्टॉक्स शामिल हैं। सबसे खास बात है इसका 13.32% हिस्सा कैश में रखना, जो मार्केट की गिरावट में एक सुरक्षा कवच का काम करता है।
Invesco India Smallcap Fund: ताहिर बादशाह और आदित्य खेमानी का यह फंड एक केंद्रित (Concentrated) अप्रोच रखता है। करीब 70 स्टॉक्स के साथ, यह फंड अपने टॉप 10 होल्डिंग्स में 35% एसेट निवेश करता है। इनका कैश लेवल काफी कम 4.76% है, जो दिखाता है कि ये पूरी तरह से अपने हाई-कन्विक्शन स्टॉक्स पर दांव लगाने के पक्ष में हैं।
Nippon India Small Cap Fund: ₹82,580 करोड़ के AUM के साथ यह इस कैटेगरी का सबसे बड़ा फंड है। समीर राछ द्वारा मैनेज किए जा रहे इस फंड में लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए 254 स्टॉक्स हैं। भारी फंड को संभालने के लिए इसमें केवल 2.73% कैश रखा गया है और 14.21% हिस्सा लार्ज-कैप स्टॉक्स में निवेशित है, ताकि बड़े निवेश को मैनेज करते समय मार्केट पर असर न पड़े।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
स्मॉल-कैप फंड्स एक जैसे नहीं होते। जिस फंड में कैश ज्यादा है, वह बाजार की बड़ी गिरावट में बेहतर बचाव कर सकता है, जबकि केंद्रित फंड बाजार में उछाल के दौरान ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं। किसी भी फंड को चुनने से पहले उसके फैक्ट शीट को जरूर देखें कि मैनेजर की रणनीति क्या है और पोर्टफोलियो का रिस्क प्रोफाइल क्या है। केवल पास्ट रिटर्न्स देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।
