Shriram AMC का बड़ा दांव: तीन हाइब्रिड फंड्स में बदली निवेश की रणनीति!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Shriram AMC का बड़ा दांव: तीन हाइब्रिड फंड्स में बदली निवेश की रणनीति!

Shriram Asset Management Company (AMC) ने अपने तीन हाइब्रिड फंड्स - मल्टी एसेट एलोकेशन, एग्रेसिव हाइब्रिड और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स के लिए नई निवेश रणनीति का ऐलान किया है। अब कंपनी 'ग्रोथ एट ए रीजनेबल प्राइस' (GARP) मेथड से इक्विटी में निवेश करेगी और डेट व कीमती धातुओं में डायनामिक एलोकेशन करेगी।

Shriram AMC ने बदली हाइब्रिड फंड्स की चाल

Shriram Asset Management Company (AMC) ने बाजार की बदलती चाल को देखते हुए अपने तीन बड़े हाइब्रिड फंड्स में बड़ा फेरबदल किया है। इस नई रणनीति के तहत, Shriram Multi Asset Allocation Fund, Shriram Aggressive Hybrid Fund, और Shriram Balanced Advantage Fund के पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के तरीके को अपडेट किया गया है।

'ग्रोथ एट ए रीजनेबल प्राइस' का चलेगा जादू

अब फंड मैनेजर्स इक्विटी, डेट और कीमती धातुओं जैसे सोना-चांदी में पैसे को समझदारी से घुमाएंगे। खास बात ये है कि अब इक्विटी में निवेश के लिए 'ग्रोथ एट ए रीजनेबल प्राइस' (GARP) का तरीका अपनाया जाएगा। इस मेथड से ऐसी कंपनियों को चुना जाएगा जिनमें ग्रोथ की अच्छी संभावना है, लेकिन उनकी वैल्यूएशन (Valuation) अभी भी वाजिब लग रही है। फिक्स्ड इनकम यानी डेट में निवेश के लिए भी रिसर्च-बेस्ड अप्रोच अपनाई जाएगी।

फंड्स का नया फोकस

  • Shriram Balanced Advantage Fund: यह फंड बाजार के उतार-चढ़ाव में इक्विटी और डेट का मिक्स बनाए रखेगा।
  • Shriram Aggressive Hybrid Fund: यह फंड उन निवेशकों के लिए है जो ज्यादा रिस्क लेने को तैयार हैं और लंबी अवधि में इक्विटी से अच्छा रिटर्न चाहते हैं।
  • Shriram Multi Asset Allocation Fund: यह फंड इक्विटी, डेट और कीमती धातु ETFs का एक डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो पेश करेगा।

मैनेजमेंट की मंशा और डिस्ट्रिब्यूटर्स के लिए मौका

Shriram AMC के MD और CEO, कार्तिक जैन का कहना है कि इस बदलाव का मकसद लंबी अवधि के पोर्टफोलियो बनाने में सिस्टेमैटिक एसेट एलोकेशन के महत्व पर जोर देना है। वहीं, सीनियर फंड मैनेजर, प्रतेेक निगुड़कर ने बताया कि नई प्रक्रिया में अलग-अलग एसेट क्लास में एक्टिव मैनेजमेंट के साथ-साथ रिसर्च-ड्रिवन निवेश का मेल होगा। कंपनी ने म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर्स के लिए 15 जुलाई से 7 अगस्त तक एक पार्टनर अपॉर्चुनिटी विंडो खोली है, ताकि वे इस नई रणनीति को समझ सकें और संभावित इनफ्लो या री-एलोकेशन के लिए तैयार हो सकें।

निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि इस नई रणनीति से इन हाइब्रिड फंड्स की परफॉर्मेंस कितनी कंसिस्टेंट (Consistent) रहती है। हालांकि, डायनामिक एलोकेशन की सफलता फंड मैनेजर की एसेट क्लास के बीच सही समय पर पैसे को शिफ्ट करने की काबिलियत पर निर्भर करेगी।

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