सेक्टरल म्यूचुअल फंड में जून में ₹1,469 करोड़ का निवेश, 127% की भारी बढ़ोतरी

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AuthorNeha Patil|Published at:
सेक्टरल म्यूचुअल फंड में जून में ₹1,469 करोड़ का निवेश, 127% की भारी बढ़ोतरी

जून में सेक्टरल और थीमैटिक म्यूचुअल फंड में ₹1,469 करोड़ का इनफ्लो आया, जो मई की तुलना में 127% ज्यादा है। हालांकि इस कैटेगरी में सबसे तेज ग्रोथ दिखी, यह 2026 की शुरुआती ऊंचाई से अभी भी नीचे है। इसी अवधि में मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड्स में ज्यादा निवेश जारी रहा।

जून में म्यूचुअल फंड में आई बंपर तेजी

निवेशकों ने जून 2026 में सेक्टरल और थीमैटिक म्यूचुअल फंड में फिर से दिलचस्पी दिखाई है। इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, इन खास फंडों में नेट इनफ्लो बढ़कर ₹1,469 करोड़ हो गया, जो मई में ₹648 करोड़ था। यह पिछले महीने के मुकाबले 126.8% की शानदार बढ़ोतरी है, जो सभी इक्विटी म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे तेज रिकवरी दर को दर्शाता है।

क्या हैं सेक्टरल और थीमैटिक फंड?

सेक्टरल और थीमैटिक फंड खास इंडस्ट्री या थीम पर फोकस करते हैं, न कि अलग-अलग स्टॉक्स के मिले-जुले पोर्टफोलियो पर। इसी वजह से इनका प्रदर्शन उस खास सेक्टर से जुड़ा होता है, जिससे ये ब्रॉड-बेस्ड फंड्स के मुकाबले ज्यादा वोलेटाइल (अस्थिर) होते हैं। जून की यह तेजी एक अहम बदलाव है, लेकिन इसमें निवेशकों की दिलचस्पी कुछ कम हुई थी। जून का इनफ्लो अप्रैल के मुकाबले करीब 25% और मार्च 2026 के स्तर से 46% कम था। इस कैटेगरी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर लगभग ₹5.46 लाख करोड़ हो गया, जो मई में ₹5.34 लाख करोड़ था।

कहां आया सबसे ज्यादा पैसा?

हालांकि, परसेंटेज के हिसाब से ग्रोथ तेज रही, पर जून में सबसे ज्यादा पैसा इन फंड्स में नहीं आया। निवेशकों ने ब्रॉड-बेस्ड इक्विटी स्ट्रेटेजी को तरजीह दी। मिड-कैप फंड्स सबसे पसंदीदा रहे, जिनमें ₹6,090 करोड़ का नेट इनफ्लो आया। इसके बाद स्मॉल-कैप फंड्स में ₹5,602 करोड़ और फ्लेक्सी-कैप फंड्स में ₹5,231 करोड़ का इनफ्लो देखा गया। सभी इक्विटी कैटेगरी को मिलाकर कुल इनफ्लो ₹28,973 करोड़ रहा, जो पिछले महीने के मुकाबले 26.5% ज्यादा है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

यह डेटा बताता है कि खास सेक्टर फंड्स में फिर से रुचि तो दिख रही है, लेकिन कुल इक्विटी इनफ्लो में इनका हिस्सा मिड-कैप और स्मॉल-कैप जैसे डाइवर्सिफाइड फंड्स के मुकाबले कम है। सेक्टर फंड्स ज्यादा कंसन्ट्रेटेड (केंद्रित) होने के कारण, इनका भविष्य प्रदर्शन उस खास इंडस्ट्री के ग्रोथ और रेगुलेटरी माहौल पर निर्भर करेगा। निवेशक इन स्पेशलाइज्ड स्ट्रेटेजी को चुनने से पहले अंडरलाइंग सेक्टर ट्रेंड्स और अपने रिस्क लेने की क्षमता पर विचार कर सकते हैं।

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