अगस्त 2026 में Samvitti Capital Alpha ने इंडिया के लॉन्ग-शॉर्ट कैटेगरी 3 AIF में बाजी मार ली है। जहां Nifty 50 में **1.14%** की गिरावट रही, वहीं इस फंड ने **6.1%** का दमदार रिटर्न दिया है। डेटा साफ इशारा कर रहा है कि छोटे और फुर्तीले फंड्स मार्केट की उतार-चढ़ाव भरी स्थिति में बड़े फंड्स से कहीं बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
भारत के कैटेगरी 3 ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) मार्केट में अगस्त 2026 के दौरान परफॉर्मेंस का बड़ा अंतर देखने को मिला है। लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स में Samvitti Capital Alpha ने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि इसी अवधि में Nifty 50 इंडेक्स 1.14% टूट गया था, जो बताता है कि पारंपरिक निवेश के लिए यह समय कितना चुनौतीपूर्ण था।
लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स को मार्केट की उठापटक झेलने के हिसाब से बनाया जाता है। ये फंड्स उन शेयरों को खरीदते हैं जिनके बढ़ने की उम्मीद होती है और उन शेयरों को शॉर्ट-सेल (बेचते) करते हैं जिनके गिरने का अंदेशा होता है। PMS AIF WORLD के डेटा के मुताबिक, ट्रैक किए गए 32 फंड्स में से ज्यादातर ने निगेटिव रिटर्न से खुद को बचाए रखा, जो बाजार में आई गिरावट के दौरान इन फंड्स की सुरक्षात्मक क्षमता को साबित करता है।
बड़े फंड्स के मुकाबले 'एजिलिटी' का दम
इस फाइनेंशियल ईयर में एक बड़ा ट्रेंड दिखा है कि बड़े फंड्स छोटे और फोकस्ड फंड्स की रफ्तार नहीं पकड़ पा रहे हैं। उदाहरण के लिए, ₹1,677 करोड़ का AUM संभालने वाला Nuvama Enhanced Dynamic Growth Equity, जो इस कैटेगरी के सबसे बड़े फंड्स में है, अगस्त में सिर्फ 0.4% का रिटर्न ही दे पाया। छोटे फंड्स अपनी फुर्ती के चलते मार्केट की कमियों का फायदा जल्दी उठा लेते हैं, जबकि भारी भरकम फंड्स को अपनी पोजीशन बदलने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
नए खिलाड़ियों का प्रदर्शन
मार्केट में नए फंड्स के बीच भी कड़ी टक्कर है। K-Three Alternative Trust - I ने अगस्त में 4.7% रिटर्न के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वहीं, महज दो महीने पुराने Grey Sky Capital Flexi Cap ने भी टॉप 5 में जगह बनाई। हालांकि, हर नए फंड की किस्मत अच्छी नहीं रही; Samarth Emerging जैसे फंड्स लॉन्च के बाद से ही मुनाफे के लिए जूझ रहे हैं। यह साफ है कि सिर्फ नई एंट्री या संस्थागत आकार से सफलता नहीं मिलती, निवेशकों को काफी सोच-समझकर चुनाव करना होगा।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी सीख यही है कि वे फंड के आकार से ज्यादा उसके रिस्क मैनेजमेंट और रणनीति पर ध्यान दें। मौजूदा मार्केट कंडीशन्स में छोटे और स्पेशलाइज्ड फंड्स अचानक आई गिरावट को झेलने में ज्यादा सक्षम दिख रहे हैं।
