आर्बिट्राज स्ट्रेटेजी पर दबाव
ये आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) असल में फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) मार्केट में कीमतों के छोटे-छोटे अंतर का फायदा उठाकर रिटर्न कमाते हैं। जब F&O पर लगने वाले STT में बढ़ोत्तरी होती है, तो सीधा असर इन फंड्स की कमाई पर पड़ता है। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि नए टैक्स नियमों के लागू होने के बाद, यानी अगले फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) की शुरुआत से, इन फंड्स के रिटर्न में 30 से 50 बेसिस पॉइंट (basis points) की कमी आ सकती है।
एसेट्स ग्रोथ पर असर
हाल के वर्षों में आर्बिट्राज फंड्स की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (Assets Under Management - AUM) में ज़बरदस्त उछाल देखा गया है। पिछले साल (2023) डेट फंड्स (Debt Funds) पर टैक्स नियमों में बदलाव के बाद से इन फंड्स का आकार करीब-करीब चार गुना बढ़कर ₹2.8 ट्रिलियन तक पहुंच गया है। Capitalmind Asset Management के CEO, दीपक सैनॉय (Deepak Shenoy) के मुताबिक, आर्बिट्राज फंड्स फ्यूचर्स ट्रेडिंग में बड़ा रोल निभाते हैं और STT में इस बढ़ोत्तरी से उनके रिटर्न में करीब 0.5% की कमी आ सकती है। Edelweiss MF के विश्लेषण से यह भी पता चलता है कि अगर फंड्स अपनी 70% एसेट्स पर आर्बिट्राज स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करते हैं, तो उनके सालाना रिटर्न में 0.32 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
टैक्स का फायदा अभी भी बाकी
हालांकि, रिटर्न में कमी की आशंका के बावजूद, आर्बिट्राज फंड्स अभी भी पारंपरिक लिक्विड फंड्स (Liquid Funds) की तुलना में बेहतर साबित हो सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इन फंड्स पर लगने वाला टैक्स, इक्विटी टैक्सेशन (Equity Taxation) के दायरे में आता है। यानी, अगर आपने एक साल से ज़्यादा समय के लिए निवेश किया है, तो आपको केवल 12.5% टैक्स देना होगा। वहीं, डेट फंड्स पर लगने वाला टैक्स 30% से भी ज़्यादा हो सकता है। Waterfield Advisors के मैनेजिंग डायरेक्टर, विवेक राजारामन (Vivek Rajaraman) कहते हैं कि रिटर्न कम होने से इनकी चमक थोड़ी फीकी पड़ सकती है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में पैसा पार्क करने के लिए लिक्विड या अल्ट्रा-शॉर्ट ड्यूरेशन फंड्स (Ultra-Short Duration Funds) की तुलना में टैक्स का फायदा अभी भी इन्हें मुकाबले में बनाए रखेगा।
व्यापक बाज़ार पर प्रभाव
STT में हुआ यह बदलाव सिर्फ सीधे आर्बिट्राज फंड्स तक ही सीमित नहीं रहेगा। जिन हाइब्रिड स्कीम्स (Hybrid Schemes) में आर्बिट्राज स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल होता है, जैसे कि इक्विटी सेविंग्स फंड्स (Equity Savings Funds) और कुछ मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (Multi-Asset Allocation Funds), उन पर भी इसका असर पड़ेगा। इसके अलावा, म्यूच्यूअल फंड्स (Mutual Funds) के नए सेगमेंट 'स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स' (Specialised Investment Funds - SIFs) पर भी F&O में बढ़े हुए STT का असर देखने को मिलेगा।