STT Hike का बड़ा झटका! Arbitrage Funds के Returns में **0.50%** तक की गिरावट की आशंका

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AuthorMehul Desai|Published at:
STT Hike का बड़ा झटका! Arbitrage Funds के Returns में **0.50%** तक की गिरावट की आशंका
Overview

यूनियन बजट 2026 में डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का ऐलान किया गया है, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस टैक्स बढ़ोतरी से आर्बिट्राज फंड्स (Arbitrage Funds) के नेट रिटर्न्स में सालाना **0.30% से 0.50%** तक की कमी आने की उम्मीद है।

STT का बढ़ता बोझ: आर्बिट्राज फंड्स की कमाई पर असर!

यूनियन बजट 2026 में वित्त मंत्री द्वारा किए गए प्रस्तावों में डेरिवेटिव्स पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी शामिल है। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा। इस टैक्स बढ़ोतरी का सीधा असर आर्बिट्राज फंड्स की प्रॉफिटेबिलिटी पर पड़ने की आशंका है, जो कैश और फ्यूचर्स मार्केट के बीच प्राइस डिस्क्रिपेंसी का फायदा उठाकर पतले मार्जिन पर काम करते हैं। एडलवाइस म्यूचुअल फंड का अनुमान है कि इससे फंड रिटर्न्स में लगभग 25 से 30 बेसिस पॉइंट्स (bps) की कमी आ सकती है। वहीं, कुछ मार्केट ऑब्जर्वर का कहना है कि यह असर सालाना 0.50% तक भी जा सकता है। अनुमान यह भी है कि 0.30% का एडिशनल कॉस्ट रिटर्न में 0.90% की गिरावट ला सकता है, या फिर सामान्य तौर पर 0.20% से 0.40% की सालाना कमी देखी जा सकती है।

क्यों हुआ ये बदलाव?

यह बढ़ी हुई STT दरें खासकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग को टारगेट करती हैं। इक्विटी फ्यूचर्स पर टैक्स 0.02% से बढ़कर 0.05% हो जाएगा, जो 150% की भारी बढ़ोतरी है। इसी तरह, ऑप्शंस प्रीमियम और एक्सरसाइज्ड ऑप्शंस पर STT में भी बढ़ोतरी होगी, जिसमें रेट 0.10% / 0.125% से बढ़कर 0.15% हो सकते हैं। इससे आर्बिट्राज फंड्स के ट्रांजैक्शन कॉस्ट में सीधे तौर पर इजाफा होगा। ये फंड्स, जो अक्सर मंथली रोलओवर्स में बड़ी मात्रा में एसेट डिप्लॉय करते हैं, ऐसे कॉस्ट इंक्रीज के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं। एडलवाइस म्यूचुअल फंड के भवेश जैन ने बताया कि भले ही सीधा STT कॉस्ट तीन बेसिस पॉइंट्स बढ़ रहा हो, लेकिन रोलओवर और पोर्टफोलियो चर्न को मिलाकर कुल असर काफी ज्यादा हो सकता है। बजट के इन फिस्कल मेजर्स, जिसमें STT हाइक भी शामिल है, पर बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी। 1 फरवरी 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी।

गहराई से विश्लेषण: आर्बिट्राज फंड्स की रणनीति पर असर

आर्बिट्राज फंड्स को पारंपरिक रूप से उनके लो-रिस्क प्रोफाइल और टैक्स एफिशिएंसी के लिए पसंद किया जाता रहा है, जो अक्सर टैक्स के बाद लिक्विड फंड्स से बेहतर रिटर्न देते थे। उनकी स्ट्रैटेजी एसेट के प्राइस डिफरेंस से मुनाफा कमाने के लिए साइमलटेनियसली खरीदने और बेचने की होती है, जिससे रिटर्न्स आम तौर पर 6-8% के बीच रहे हैं। हालांकि, बढ़ी हुई STT सीधे तौर पर इन पतले मार्जिन को कम कर देगी, जिससे लिक्विड फंड्स की तुलना में रिटर्न डिफरेंशियल कम हो जाएगा। रेगुलेशन्स के तहत, आर्बिट्राज फंड्स को अपनी स्ट्रैटेजी के लिए सिंगल स्टॉक फ्यूचर्स का इस्तेमाल करना होता है, जिससे वे टैक्स बर्डन को कम करने के लिए ऑप्शंस में शिफ्ट नहीं कर सकते। फंड्स भले ही बेहतर रोलओवर स्प्रेड्स पर नेगोशिएट करके कुछ लागत वसूलने की कोशिश करें, लेकिन नेट रिटर्न्स में कुछ कमी आना तय है। सरकार का STT हाइक के पीछे का इरादा अत्यधिक सट्टा गतिविधि पर अंकुश लगाना और शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग व्यवहार को नियंत्रित करना है।

आगे क्या?

रिटर्न्स में अनुमानित कमी के बावजूद, आर्बिट्राज फंड्स के टैक्स एफिशिएंट बने रहने की उम्मीद है, लेकिन उनकी कॉम्पिटिटिव एज कम हो जाएगी। निवेशकों को यह उम्मीद करनी चाहिए कि कम नेट यील्ड के कारण आइडल कैश के लिए शॉर्ट-टर्म पार्किंग सॉल्यूशन के रूप में आर्बिट्राज फंड्स की अट्रैक्टिवनेस कम हो सकती है। बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स और इक्विटी सेविंग्स फंड्स जैसे अन्य हाइब्रिड प्रोडक्ट्स पर भी असर पड़ने की उम्मीद है, हालांकि यह कम प्रोनाउंसड हो सकता है। रिवाइज्ड STT रेट्स 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो जाएंगे, जिसका मतलब है कि फंड परफॉर्मेंस पर पूरा असर इसके बाद ही मटीरियलाइज होना शुरू होगा।

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