Specialized Investment Funds: SIP शुरू करने से पहले जान लें ₹10 लाख का यह 'खतरनाक' नियम

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Specialized Investment Funds: SIP शुरू करने से पहले जान लें ₹10 लाख का यह 'खतरनाक' नियम

Specialized Investment Funds (SIFs) में SIP का विकल्प तो मिलता है, लेकिन ये आम म्यूचुअल फंड्स से बिल्कुल अलग और सख्त नियमों पर चलते हैं। अगर आपका PAN-लेवल बैलेंस ₹10 लाख से नीचे गिरा, तो आपकी पूरी इन्वेस्टमेंट ऑटोमैटिकली कैश-आउट हो सकती है या अकाउंट फ्रीज किया जा सकता है।

नियम को समझना जरूरी

अगर आप Specialized Investment Funds (SIFs) में SIP के जरिए निवेश का मन बना रहे हैं, तो रुकिए। ये फंड्स सामान्य म्यूचुअल फंड्स की तरह नहीं चलते। सबसे बड़ा नियम यह है कि आपको एसेट मैनेजमेंट कंपनी के पास अपने PAN-लेवल पर हर हाल में कम से कम ₹10 लाख का बैलेंस बनाए रखना होगा। यह कोई वन-टाइम एंट्री फीस नहीं, बल्कि एक परमानेंट कंडीशन है।

लिक्विडिटी रिस्क और 30 दिन का समय

आम फंड्स के उलट, यहां लिक्विडिटी रिस्क काफी ज्यादा है। यदि आप पैसा निकालते हैं और आपका बैलेंस ₹10 लाख से कम हो जाता है, तो फंड हाउस आपके यूनिट्स को फ्रीज कर सकता है। आपको 30 दिनों का समय दिया जाता है ताकि आप फंड डालकर बैलेंस को फिर से ₹10 लाख तक पहुंचा सकें। अगर आप ऐसा नहीं करते, तो आपकी पूरी की पूरी इन्वेस्टमेंट को जबरन कैश-आउट (Liquidation) किया जा सकता है।

मार्केट की गिरावट का असर

अगर मार्केट के खराब परफॉरमेंस की वजह से आपकी वैल्यू ₹10 लाख से नीचे गिरती है, तो भी आप मुश्किल में फंस सकते हैं। ऐसे में आपको पार्ट-विड्रॉल (आंशिक निकासी) की सुविधा नहीं मिलेगी। आपको बाहर निकलने के लिए पूरी रकम यानी फुल लिक्विडेशन का रास्ता ही चुनना होगा।

जटिल रणनीतियां और सावधानी

SIFs अक्सर डेरिवेटिव्स (Derivatives) या लॉन्ग-शॉर्ट जैसी जटिल रणनीतियों का इस्तेमाल करते हैं। इनके नियम, एग्जिट पेनल्टी (Exit Penalty) और लिक्विडिटी शर्तें हर फंड के लिए अलग होती हैं। इसलिए, निवेश का बटन दबाने से पहले फंड के स्ट्रैटेजी डॉक्यूमेंट्स को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि इन फंड्स में 'एवरेजिंग' का फायदा वैसे काम नहीं करता जैसे इक्विटी फंड्स में करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.