सितंबर 2026 में शेयर बाजार में **5.8%** की गिरावट के बावजूद भारतीय निवेशकों ने अपनी समझदारी दिखाई है। म्यूचुअल फंड SIP में रिकॉर्ड **₹32,490 करोड़** का निवेश आया है, जो बताता है कि रिटेल निवेशक अब लंबी अवधि के नजरिए पर टिके हैं।
मार्केट की अस्थिरता के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड निवेशकों का अनुशासन देखने लायक है। जहां एक ओर Sensex में 5.8% की गिरावट दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर SIP के जरिए रिकॉर्ड निवेश ने यह साबित कर दिया है कि निवेशक अब शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव से घबरा नहीं रहे हैं।\n\n### मार्केट की तस्वीर और AUM\nसितंबर 2026 में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 5.1% गिरकर ₹82.6 लाख करोड़ पर आ गया। इसका मुख्य कारण डेट फंड्स से पैसा निकलना और मार्केट वैल्यू में आई गिरावट थी। हालांकि, इक्विटी स्कीम्स में ₹38,306 करोड़ का भारी निवेश आया है, जो पिछले 5 महीनों का उच्चतम स्तर है। खास बात यह है कि स्मॉल-कैप फंड्स में भी रिकॉर्ड ₹9,036 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया है।\n\n### पोर्टफोलियो के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह\nमार्केट एनालिस्ट्स का मानना है कि स्मॉल-कैप में निवेश को लेकर अब सावधानी बरतनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ स्मॉल-कैप या सेक्टर-स्पेसिफिक बेट्स लगाने के बजाय, फ्लेक्सी-कैप फंड्स (Flexi-cap funds) जैसे विकल्पों पर गौर करना बेहतर है, जो मार्केट की स्थिति के अनुसार लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप में पैसा बदल सकते हैं।\n\n### जोखिम प्रबंधन (Risk Management)\nइन्वेस्टमेंट का नजरिया पोर्टफोलियो तय करने में अहम भूमिका निभाता है। अगर आपका निवेश का लक्ष्य 5 साल के आसपास है, तो हाइब्रिड या मल्टी-एसेट फंड्स बेहतर हो सकते हैं। वहीं, 7 से 10 साल के निवेश के लिए डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स पर फोकस करना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेशक 'रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग' (Rupee-cost averaging) का फायदा उठाते रहें, जिससे गिरावट के दौर में भी पोर्टफोलियो को मजबूती मिलती है।
