SEBI की नई पहल और फंड्स का उभार
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने 1 अप्रैल, 2025 को स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) के लिए नया फ्रेमवर्क पेश किया था। इसके बाद अगस्त के अंत से स्कीमों को लॉन्च किया जाने लगा। फिलहाल, 11 एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) द्वारा 19 अलग-अलग SIF स्ट्रैटेजी पर काम किया जा रहा है।
जटिल स्ट्रैटेजी और एग्जीक्यूशन की चुनौतियां
इन फंड्स में डेरिवेटिव्स (derivatives) का इस्तेमाल, शॉर्ट सेलिंग (short selling) और स्टॉक, बॉन्ड, कमोडिटी (commodity), रियल एस्टेट या इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट्स में फ्लेक्सिबल एसेट एलोकेशन जैसी एडवांस्ड स्ट्रैटेजी अपनाई जाती हैं। इसका मकसद अलग-अलग मार्केट कंडीशंस में रिटर्न जेनरेट करना और गिरावट के दौरान कैपिटल को सुरक्षित रखना है। हालांकि, इससे एग्जीक्यूशन (execution) में काफी जटिलता आती है। फंड मैनेजर्स को सटीक समय पर ट्रेड करने, लीवरेज (leverage) को सावधानी से मैनेज करने और जोखिमों को कंट्रोल करने की जरूरत होती है। यह इन्हें स्टैंडर्ड इक्विटी या डेट फंड्स से कहीं ज्यादा कॉम्प्लेक्स बना देता है, और निवेशकों के लिए इनके परफॉरमेंस का मूल्यांकन करना मुश्किल हो जाता है।
खर्च ज्यादा, ट्रैक रिकॉर्ड कम
इन एडवांस्ड स्ट्रैटेजी, एक्टिव मैनेजमेंट और हेजिंग (hedging) के कारण, इनका एक्सपेंस रेशियो (expense ratio) आम म्यूचुअल फंड्स की तुलना में ज्यादा होता है। आयोनिक वेल्थ (Ionic Wealth) के को-फाउंडर धर्मेंद्र जैन का कहना है कि SIFs का लक्ष्य कैपिटल को सुरक्षित रखना और मार्केट से बेहतर रिटर्न देना है, साथ ही ये म्यूचुअल फंड्स की तरह टैक्स बेनिफिट्स भी देते हैं। लेकिन, इनक्रेड मनी (InCred Money) के सीईओ नितिन अग्रवाल बताते हैं कि SIFs के पास यह साबित करने के लिए लंबा ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है कि वे मौजूदा फंड्स से बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न दे पाएंगे।
वितरकों की कमी: सबसे बड़ी अड़चन
एक बड़ी चिंता यह है कि क्या डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क (distribution network) तैयार है। मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (Mirae Asset Investment Managers) की हेड ऑफ डिस्ट्रिब्यूशन, सुरंजना बोर्थाकुर ने एक बड़ी रुकावट बताई: "लगभग 1.5 लाख रजिस्टर्ड म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर्स की तुलना में सिर्फ 3,000 सर्टिफाइड डिस्ट्रिब्यूटर्स का होना, सर्टिफिकेशन गैप इंडस्ट्री की सबसे बड़ी चुनौती है।" SIFs को बेचने के लिए हर स्ट्रैटेजी के लक्ष्यों, लिक्विडिटी (liquidity) और क्लाइंट की उपयुक्तता की गहरी समझ की आवश्यकता होती है, जिसके लिए पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स से कहीं ज्यादा डिटेल्ड अप्रोच चाहिए।
कौन करें निवेश?
₹10 लाख प्रति पैन के मिनिमम इन्वेस्टमेंट के साथ, SIFs मुख्य रूप से हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs), फैमिली ऑफिसेस (अमीर परिवारों के प्रोफेशनल वेल्थ मैनेजर) और अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए हैं। ये वो निवेशक होते हैं जिनके पास अच्छी-खासी दौलत, फाइनेंशियल मार्केट्स की अच्छी समझ और रिस्क झेलने की ज्यादा क्षमता होती है। ये म्यूचुअल फंड्स से ज्यादा रिफाइंड रिस्क मैनेजमेंट चाहते हैं, बिना किसी कॉम्प्लेक्स फंड के लिए जरूरी कमिटमेंट के। एक्सपर्ट्स जोर देते हैं कि SIFs पहली बार निवेश करने वालों के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं हैं।
