म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए बड़ी राहत की खबर है। SEBI ने नियमों में बदलाव करते हुए एसेट मैनेजर्स को **29** मौजूदा रिटायरमेंट स्कीम को जारी रखने की अनुमति दे दी है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटायरमेंट-केंद्रित प्रोडक्ट्स को लेकर काफी समय से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। फरवरी 2026 में SEBI ने एक प्रस्ताव रखा था, जिसके तहत पुराने रिटायरमेंट और चिल्ड्रन्स फंड को खत्म करके 'लाइफ साइकिल फंड' (Life Cycle Fund) स्ट्रक्चर लागू करने की बात कही गई थी। इस खबर से मौजूदा पोर्टफोलियो और निवेश रणनीतियों को लेकर निवेशक चिंतित थे।
क्या है नया बदलाव?
मार्च 2026 में आए एक नियामक बदलाव (Regulatory Pivot) के बाद, अब एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMCs) को अपने मौजूदा रिटायरमेंट फंड्स को चालू रखने की छूट मिल गई है। इस फैसले से लगभग 29 ऐसी स्कीमों का भविष्य सुरक्षित हो गया है, जिनमें कुल मिलाकर ₹33,400 करोड़ से ज्यादा का निवेश फंसा हुआ था। हालांकि, फंड हाउस अब सीमित संख्या में ही नए 'लाइफ साइकिल फंड' लॉन्च कर सकेंगे।
निवेशकों के लिए काम की बातें
इन फंड्स में आमतौर पर 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है या फिर निवेशक के 60 साल की उम्र तक होने तक पैसा लॉक रहता है। उदाहरण के लिए, ICICI Prudential Retirement Fund-Hybrid Aggressive Plan को ही देखें, जो करीब ₹1,320.5 करोड़ का फंड मैनेज कर रहा है। यह फंड 75% से 85% तक इक्विटी और बाकी हिस्सा डेट में निवेश करता है।
ध्यान रखें ये रिस्क
निवेशकों को यह समझना जरूरी है कि ये म्यूचुअल फंड्स PPF जैसे पारंपरिक निवेश साधनों की तरह 'सेक्शन 80C' के तहत टैक्स छूट नहीं देते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य प्रोफेशनल मैनेजमेंट के जरिए लॉन्ग-टर्म ग्रोथ है। इसके अलावा, लॉक-इन पीरियड की वजह से आप बाजार की गिरावट या इमरजेंसी के समय आसानी से पैसा नहीं निकाल सकते। निवेश करने से पहले फंड के एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) और फंड मैनेजर की परफॉर्मेंस पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
