SBI Mutual Fund का बड़ा प्लान: 5 साल में AUM ₹26 लाख करोड़ पार करने का लक्ष्य

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AuthorMehul Desai|Published at:
SBI Mutual Fund का बड़ा प्लान: 5 साल में AUM ₹26 लाख करोड़ पार करने का लक्ष्य

SBI Mutual Fund ने अगले 5 सालों में अपने एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) को दोगुना करके ₹26 लाख करोड़ तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस प्लान के तहत कंपनी छोटे शहरों में अपनी पहुंच बढ़ाएगी, निवेशकों की संख्या 3.5 करोड़ तक ले जाएगी और वैकल्पिक व अंतरराष्ट्रीय निवेश प्रोडक्ट्स में भी विस्तार करेगी।

छोटे शहरों पर खास फोकस

SBI Mutual Fund के इस ग्रोथ प्लान का एक अहम हिस्सा छोटे शहरों (Tier 2 और Tier 3) में अपनी उपस्थिति बढ़ाना है। फिलहाल, AUM का करीब 30% हिस्सा टॉप 30 शहरों (B30) के बाहर से आता है। कंपनी का लक्ष्य अगले 3 सालों में इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50% करना है। मैनेजमेंट का मानना है कि निवेश के क्षेत्र में अगली बड़ी ग्रोथ इन छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों से आएगी। इसे हासिल करने के लिए, फंड हाउस अगले 5 सालों में अपने कुल निवेशकों की संख्या को 1.6 करोड़ से बढ़ाकर 3.5 करोड़ करने की योजना बना रहा है, जिसके लिए डिजिटल माध्यमों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा।

नए प्रोडक्ट्स और पार्टनरशिप

पारंपरिक म्यूचुअल फंड स्कीम्स के अलावा, SBI Mutual Fund नए प्रोडक्ट कैटेगरी जैसे पैसिव फंड्स, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स और इंटरनेशनल इन्वेस्टमेंट ऑफर्स में भी कदम रखने की तैयारी में है। GIFT सिटी में मौजूद अपनी सब्सिडियरी के जरिए कंपनी इंटरनेशनल निवेश के अवसर खोलेगी। 24 सालों से चली आ रही फ्रेंच एसेट मैनेजर Amundi के साथ पार्टनरशिप भी इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी रहेगी। हालिया IPO के बाद, SBI की 56% हिस्सेदारी है, जबकि Amundi के पास 32% हिस्सेदारी है। यह पार्टनरशिप टेक्नोलॉजी, इंटरनेशनल फंड मैनेजमेंट और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी।

SBI के विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल

फंड हाउस अपनी पेरेंट कंपनी, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बड़े डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का लाभ उठाना जारी रखेगा, जिसके 23,000 से अधिक ब्रांच और 75,000 ग्राहक सेवा पॉइंट हैं। यह नेटवर्क बिजनेस का एक प्रमुख स्रोत है। इसके साथ ही, फंड हाउस अन्य पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर बैंकों के साथ सहयोग बढ़ाने की भी योजना बना रहा है। इसका लक्ष्य अगले 3 सालों में इन बाहरी बैंक पार्टनरशिप से बिजनेस कंट्रीब्यूशन को मौजूदा 5% से दोगुना करके करीब 10% तक ले जाना है।

निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि फंड हाउस छोटे शहरों में ऑपरेशनल चुनौतियों का सामना करते हुए निवेश प्रदर्शन को कैसे बनाए रखता है। सफलता डिजिटल टूल्स की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी, जो नए निवेशकों की रुचि को वास्तविक एसेट्स में बदल सकें, और साथ ही प्रतिस्पर्धी म्यूचुअल फंड बाजार में प्रोडक्ट डाइवर्सिफिकेशन प्लान को लागू करने की क्षमता पर भी। निवेशक नए प्रोडक्ट कैटेगरी के योगदान और टॉप 30 शहरों के बाहर से आने वाले एसेट्स की ग्रोथ पर भविष्य के अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं।

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