SBI Funds Management ने सितंबर 2026 तिमाही में अपने औसत एसेट में **10%** की जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की है। रिटेल निवेशकों के SIP में बढ़ते रुझान के चलते कंपनी का एसेट बेस **₹13.1 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है।
एसेट मैनेजमेंट में जबरदस्त उछाल
State Bank of India और फ्रांस की Amundi का जॉइंट वेंचर, SBI Funds Management Ltd, लगातार विस्तार कर रहा है। सितंबर 2026 को समाप्त तिमाही में कंपनी का औसत एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹13.1 लाख करोड़ दर्ज किया गया है, जो साल-दर-साल आधार पर 10% की बढ़त है। यह दर्शाता है कि भारतीय रिटेल निवेशक बड़ी तेजी से म्यूचुअल फंड की ओर रुख कर रहे हैं।
कमाई और मुनाफे का गणित
कंपनी का ऑपरेटिंग रेवेन्यू इस तिमाही में ₹2,336 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 12% अधिक है। वहीं, चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (H1) में कंपनी ने ₹1,797 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफिट दर्ज किया है, जिसमें 11% का इजाफा हुआ है। हालांकि, रेवेन्यू के मुकाबले मुनाफे की रफ्तार थोड़ी धीमी है, जिसके पीछे 297 शाखाओं के नेटवर्क विस्तार और बढ़ते ऑपरेशनल खर्च को मुख्य कारण माना जा रहा है।
रिटेल निवेशकों का बोलबाला
इस ग्रोथ के पीछे रिटेल निवेशकों का अहम योगदान है। कंपनी की SIP बुक 15% बढ़कर ₹2.07 लाख करोड़ हो गई है, जिससे SIP सेगमेंट में कंपनी की हिस्सेदारी 12.3% हो गई है। इसके अलावा, इक्विटी एसेट ₹9 लाख करोड़ के स्तर को छू चुके हैं, जो इस कैटेगरी में 12.4% की हिस्सेदारी दर्शाते हैं। वर्तमान में कंपनी 1.85 करोड़ निवेशकों को सेवाएं दे रही है और इसका कुल मार्केट शेयर 15% है।
आगे क्या हैं जोखिम (Risks)?
म्यूचुअल फंड बिजनेस पूरी तरह से बाजार के उतार-चढ़ाव पर टिका होता है। यदि इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट आती है, तो एसेट वैल्यू घटने से फीस इनकम पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, रेगुलेटरी मोर्चे पर एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) को लेकर होने वाले बदलाव भी भविष्य में मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि बाजार की बदलती स्थितियों के बीच कंपनी अपने इनफ्लो (Inflow) को कैसे बरकरार रखती है।
