SBI Mutual Fund: फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए बड़ी खबर! अब मिलेगा Predictable Income, लॉन्च हुए 2 नए फंड

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SBI Mutual Fund: फिक्स्ड इनकम निवेशकों के लिए बड़ी खबर! अब मिलेगा Predictable Income, लॉन्च हुए 2 नए फंड
Overview

SBI Mutual Fund ने निवेशकों के लिए दो नए ओपन-एंडेड टारगेट मैच्योरिटी डेट इंडेक्स फंड लॉन्च किए हैं: SBI CRISIL-IBX Gilt + SDL Index – Dec 2029 Fund और SBI Nifty G-Sec Jul 2031 Fund। ये फंड्स निश्चित मैच्योरिटी डेट के साथ गवर्नमेंट और स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs) में निवेश का मौका देंगे।

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बदलती ब्याज दरों के बीच SBI लाया नए फंड

SBI Mutual Fund ने भारतीय फिक्स्ड इनकम मार्केट को देखते हुए दो खास तरह के फंड लॉन्च किए हैं। ये ओपन-एंडेड टारगेट मैच्योरिटी डेट इंडेक्स फंड हैं, जिनका मकसद निवेशकों को निश्चित ब्याज दरों के अनिश्चित माहौल में Predictable Income देना है। फिलहाल 10-साल की सरकारी सिक्योरिटीज पर यील्ड (Yield) करीब 7.03% के आसपास है, जो ग्लोबल घटनाओं और महंगाई को देखते हुए ऊपर-नीचे हो सकती है। ऐसे में, टारगेट मैच्योरिटी फंड ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिम को कम करने का एक स्ट्रक्चर्ड तरीका देते हैं।

क्या है इन नए फंड्स की खासियत?

SBI CRISIL-IBX 10:90 Gilt + SDL Index – Dec 2029 Fund में सरकारी सिक्योरिटीज और स्टेट डेवलपमेंट लोन (SDLs) का मिक्स होगा, जो राष्ट्रीय और राज्य सरकारों के डेट इंस्ट्रूमेंट्स में एक्सपोजर देगा। वहीं, SBI Nifty G-Sec Jul 2031 Index Fund सिर्फ सेंट्रल गवर्नमेंट सिक्योरिटीज पर फोकस करेगा। दोनों ही फंड्स अपनी इंडेक्स परफॉर्मेंस को ट्रैक करने की कोशिश करेंगे।

निवेश का मौका और रणनीति

इन दोनों नए फंड्स का न्यू फंड ऑफर (NFO) 14 मई से 19 मई, 2026 तक खुला रहेगा। निवेशक कम से कम ₹5,000 से इन फंड्स में निवेश शुरू कर सकते हैं। ये फंड्स पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (Passive Investment Strategy) अपनाएंगे, जिसका मतलब है कि वे अपने चुने हुए इंडेक्स के रिटर्न को मैच करने की कोशिश करेंगे, न कि उसे बीट करने की। फंड्स अपनी कुल संपत्ति का 95% से 100% तक इंडेक्स सिक्योरिटीज में निवेश करेंगे, जबकि बाकी थोड़ी रकम लिक्विडिटी के लिए शॉर्ट-टर्म डेट में रखी जाएगी। ये फंड्स कोई गारंटीड रिटर्न नहीं देते। SBI Funds Management Limited के CIO – Fixed Income, Rajeev Radhakrishnan, इन दोनों स्कीम्स को मैनेज करेंगे।

मार्केट में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

SBI के अलावा HDFC, Kotak और ICICI Prudential जैसे बड़े एसेट मैनेजमेंट हाउस पहले से ही टारगेट मैच्योरिटी फंड्स मार्केट में मौजूद हैं। भारत में पैसिव इन्वेस्टिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो अब म्यूचुअल फंड एसेट्स का करीब 17% हो गया है और भविष्य में इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

निवेशकों के लिए जोखिम

हालांकि गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और SDLs को सुरक्षित माना जाता है, लेकिन निवेशकों को टारगेट मैच्योरिटी फंड्स से जुड़े कुछ जोखिमों के बारे में पता होना चाहिए। सबसे बड़ा जोखिम ब्याज दरों में होने वाला बदलाव है। अगर निवेशक फंड के मैच्योर होने से पहले अपनी यूनिट्स बेचते हैं और ब्याज दरें बढ़ गई हों, तो उन्हें नुकसान हो सकता है क्योंकि बॉन्ड की वैल्यू गिर जाती है। इसके अलावा, माइनर ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) भी फंड के प्रदर्शन को इंडेक्स से थोड़ा अलग कर सकता है। फिलहाल, 7% के यील्ड के आसपास और ग्लोबल घटनाओं को देखते हुए, इन फंड्स द्वारा होल्ड किए गए लंबी अवधि के बॉन्ड्स की वैल्यू में उतार-चढ़ाव आ सकता है। फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए सरकार का बढ़ा हुआ उधार भी यील्ड पर दबाव डाल सकता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.