देश की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी SBI Funds Management के मुनाफे में सितंबर तिमाही के दौरान **6%** की कमी आई है। इसका मुख्य कारण कंपनी के ऑपरेटिंग खर्चों में **28%** का बड़ा उछाल है, जबकि एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **10%** की ग्रोथ दर्ज की गई है।
देश की दिग्गज एसेट मैनेजमेंट कंपनी SBI Funds Management के लिए सितंबर तिमाही मिली-जुली रही। कंपनी का नेट प्रॉफिट पिछले साल की समान अवधि के ₹746 करोड़ से गिरकर ₹701 करोड़ पर आ गया है।
खर्चों का दबाव और रिवेन्यू का गणित
कंपनी की कुल रिवेन्यू में 9% की बढ़त देखी गई और यह ₹1,193 करोड़ रही। लेकिन, इस कमाई पर ऑपरेटिंग खर्चों का भारी दबाव दिखा। कंपनी के कुल खर्च 28% बढ़कर ₹301 करोड़ हो गए हैं, जिसका कारण मुख्य रूप से बढ़ा हुआ प्रशासनिक खर्च और कर्मचारियों पर किया गया निवेश है। इसके अलावा, कंपनी की 'अदर इनकम' में 57% की बड़ी गिरावट आई है, जो घटकर ₹45 करोड़ रह गई।
AUM में मजबूती बरकरार
मुनाफे में गिरावट के बावजूद, कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बनाए रखी है। कंपनी का एवरेज एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) साल-दर-साल 10% की बढ़त के साथ ₹13.14 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। निवेशकों का झुकाव इक्विटी की ओर साफ दिख रहा है, जहां इक्विटी ओरिएंटेड एसेट्स 11% बढ़कर ₹6.22 लाख करोड़ हो गए हैं। वहीं, डेट-ओरिएंटेड एसेट्स में 10% की गिरावट आई है।
SIP और भविष्य की चुनौतियां
रिटेल निवेशकों का भरोसा SIP के जरिए बना हुआ है, जिसमें 3% की बढ़त के साथ ₹3,900 करोड़ का इनफ्लो आया है। कंपनी अभी भी 16% मार्केट शेयर के साथ इंडस्ट्री में लीडर बनी हुई है। हालांकि, म्यूचुअल फंड सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कंपनी के लिए आगे की चुनौती अपने खर्चों को नियंत्रित करते हुए मार्केट लीडरशिप को बरकरार रखना है।
