SBI Dividend Yield Fund ने अपने कैटेगरी में 1 साल में सबसे ज़्यादा **2.4%** का रिटर्न दिया है। हालांकि, यह अपने बेंचमार्क इंडेक्स से **2.0%** पीछे रहा। फंड के पास अभी **₹8,300 करोड़** से ज़्यादा की संपत्ति है, जो निवेशकों के लिए मल्टी-टाइमफ्रेम पर परफॉरमेंस का विश्लेषण करना क्यों ज़रूरी है, यह बताता है।
1 साल में सबसे आगे, पर क्यों?
SBI Dividend Yield Fund ने अपने साथियों के बीच 1 साल की अवधि के लिए सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जो 2.4% का सालाना रिटर्न दे रहा है। हालांकि, यह रैंकिंग फंड की हालिया तेज़ी को दिखाती है, पर यह भी सामने आया है कि यह अपने बेंचमार्क इंडेक्स से 2.0% पीछे रह गया। फंड के असल रिटर्न और बेंचमार्क के परफॉरमेंस के बीच का यह अंतर, यह समझने के लिए एक अहम पहलू है कि क्या फंड अपने मुख्य उद्देश्य को पूरा कर रहा है।
अलग-अलग टाइमफ्रेम पर परफॉरमेंस का अंतर
म्यूचुअल फंड का परफॉरमेंस समय के साथ काफी बदल सकता है। जहां SBI Dividend Yield Fund 1 साल के चार्ट में सबसे ऊपर है, वहीं दूसरे फंडों ने अलग-अलग समय में बेहतर रिटर्न दिया है। उदाहरण के लिए, ICICI Prudential Dividend Yield Equity Fund ने 1 महीने में 4.8% का रिटर्न दर्ज किया, जबकि HDFC Dividend Yield Fund ने 3 महीने के परफॉरमेंस में 10.0% का उछाल दिखाया। वहीं, 3 साल के लंबे नज़रिए से देखें तो ICICI Prudential Dividend Yield Equity Fund ने 18.3% रिटर्न के साथ अपनी कैटेगरी में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। यह विभिन्नता बताती है कि सिर्फ एक टाइमफ्रेम पर भरोसा करना फंड की क्षमता की पूरी तस्वीर नहीं देता।
फंड का साइज़ और पोर्टफोलियो
फंड के साइज़ की बात करें तो SBI Dividend Yield Fund सेक्टर में एक मज़बूत पकड़ बनाए हुए है, जिसके एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) कुल ₹8,309.9 करोड़ हैं। यह टॉप परफॉरमेंस करने वाले डिविडेंड-यील्ड फंडों में सबसे बड़ा फंड है। इस कैटेगरी के अन्य प्रमुख फंडों में HDFC Dividend Yield Fund का AUM ₹5,610.8 करोड़, UTI Dividend Yield Fund का ₹3,749.0 करोड़ और Franklin India Dividend Yield Fund का ₹2,316.9 करोड़ है।
इन फंडों का मूल्यांकन करते समय, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि डिविडेंड-यील्ड स्कीम उन कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करती हैं जो नियमित डिविडेंड देती हैं। इसका मतलब है कि उनका रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल ग्रोथ-ओरिएंटेड फंडों से थोड़ा अलग हो सकता है। एसेट एलोकेशन, पोर्टफोलियो में चुनी गई कंपनियों की क्वालिटी और फंड मैनेजर की रणनीति जैसे फैक्टर रिटर्न तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। निवेशकों को 1-साल के रिटर्न से आगे बढ़कर, फंड की लॉन्ग-टर्म विश्वसनीयता को बेहतर ढंग से समझने के लिए 3 से 5 साल की अवधि में बेंचमार्क के मुकाबले उसकी स्थिरता का आकलन करना चाहिए।
