भारतीय रिटेल निवेशक अब बिचौलियों को बाय-बाय कर सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। कम खर्च और डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुविधा के चलते डायरेक्ट प्लान का AUM बढ़कर ₹7 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया है।
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मार्च 2026 तक डायरेक्ट प्लांस का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) उछलकर ₹7 लाख करोड़ के करीब पहुंच गया है, जो पांच साल पहले महज ₹1.6 लाख करोड़ था। यह आंकड़े बताते हैं कि निवेशक अब 'कॉस्ट-कॉन्शियस' और 'टेक-सैवी' हो रहे हैं।
क्यों डायरेक्ट प्लान में है दम?
डायरेक्ट प्लान में कोई कमीशन नहीं होता, जिसका सीधा असर 'एक्सपेंस रेशियो' पर पड़ता है। यह खर्च कम होने से लंबे समय में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है। Association of Mutual Funds in India (AMFI) के डेटा के मुताबिक, रिटेल एसेट्स में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी पांच साल पहले के 21.4% से बढ़कर 36.7% हो गई है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म का जादू
आजकल के ऐप्स और वेबसाइट्स ने निवेश को बेहद आसान बना दिया है। साल 2026 में ही डायरेक्ट प्लांस में 2.52 करोड़ नए अकाउंट्स जुड़े हैं, जबकि रेगुलर डिस्ट्रीब्यूशन चैनल में यह आंकड़ा 1.42 करोड़ रहा।
कॉर्पोरेट जगत का अलग नजरिया
जहां रिटेल निवेशक खर्च बचाने में लगे हैं, वहीं कॉर्पोरेट और संस्थागत निवेशक (Institutional Investors) अभी भी रेगुलर प्लान्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। बड़ी कंपनियां अपनी जटिल जरूरतों और एडवाइजरी सपोर्ट के लिए पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटर्स पर भरोसा बनाए हुए हैं। मार्च 2026 तक करीब 29% कॉर्पोरेट एसेट्स रेगुलर प्लान्स में ही थे।
जोखिम और सतर्कता
सीधे निवेश करने वाले निवेशकों को एक बात समझनी होगी—बाजार की उठापटक (Volatility) का असर अब सीधे आपके पोर्टफोलियो पर पड़ेगा। SEBI के नियमों में लगातार बदलाव होते रहते हैं, और अगर आप खुद निवेश मैनेज कर रहे हैं, तो इन रेगुलेटरी अपडेट्स पर नजर रखना आपकी जिम्मेदारी है। बिना डिस्ट्रीब्यूटर के, बाजार की गिरावट के दौरान आपको खुद ही अपने निवेश का अनुशासन (Discipline) बनाए रखना होगा।
