भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। जून 2026 तक, कुल असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का **61%** अब व्यक्तिगत निवेशकों के पास है, जो पिछले महीने के **60%** से ज़्यादा है।
Detailed Coverage
रिटेल निवेशकों की बढ़ी पकड़: म्यूचुअल फंड AUM में 61% हिस्सेदारी
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की भागीदारी एक स्ट्रक्चरल शिफ्ट दिखा रही है। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कुल असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 61% हिस्सा व्यक्तिगत निवेशकों के पास आ गया है, जो मई 2026 के 60% के आंकड़े से अधिक है। यह लगातार ग्रोथ भारत में बचत के फाइनेंशियलाइजेशन (financialization) के एक लॉन्ग-टर्म ट्रेंड को दर्शाता है, जहां परिवार पारंपरिक निवेशों जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट की जगह मार्केट-लिंक्ड इंस्ट्रूमेंट्स को ज़्यादा पसंद कर रहे हैं।
इंडस्ट्री AUM ग्रोथ और SIP रिकॉर्ड्स
जून 2026 तक इंडस्ट्री का कुल AUM ₹82.22 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो जून 2025 की तुलना में 10.5% की ग्रोथ दर्शाता है। इस स्थिरता का एक बड़ा कारण सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) रूट रहा है। जून में SIP से की गई निवेश राशि ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जो पिछले साल इसी महीने के ₹27,269 करोड़ की तुलना में 17% ज़्यादा है। एक्टिव SIP अकाउंट्स की संख्या भी बढ़कर 10.52 करोड़ हो गई है। यह दिखाता है कि न केवल निवेशकों की संख्या बढ़ रही है, बल्कि औसत मासिक निवेश भी अब ₹3,022 के स्तर पर पहुँचकर ऊपर की ओर जा रहा है।
इक्विटी, कमोडिटी और रीजनल ट्रेंड्स
इक्विटी फंड्स अभी भी निवेशकों के लिए मुख्य आकर्षण बने हुए हैं, जिनका AUM सालाना 11.5% बढ़कर ₹37.38 लाख करोड़ हो गया है। इक्विटी सेगमेंट में, मिडकैप और स्मॉलकैप कैटेगरीज ने सबसे ज़्यादा नया निवेश आकर्षित किया है। इक्विटी पसंदीदा बनी हुई है, लेकिन निवेशक नई एसेट क्लासेस में भी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) का AUM 2.6 गुना बढ़कर ₹1.70 लाख करोड़ हो गया है, जबकि सिल्वर ईटीएफ (Silver ETF) करीब चार गुना बढ़कर ₹79,000 करोड़ तक पहुंच गया है। मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (Multi-asset allocation funds) ने भी अपना मोमेंटम बनाए रखा, जून में ₹4,811 करोड़ आकर्षित किए, जिससे उनका कुल AUM ₹1.96 लाख करोड़ हो गया है।
मेट्रो शहरों से आगे बढ़ता विस्तार
यह ग्रोथ अब बड़े शहरी केंद्रों तक ही सीमित नहीं है। B30 शहरों (टॉप 30 मेट्रो शहरों से बाहर के स्थान) से आने वाली असेट्स अब कुल इंडस्ट्री AUM का 19% हिस्सा रखती हैं, जो 2020 के अंत में 16% थी। यह टियर-2 और टियर-3 बाजारों में गहरी पैठ का संकेत देता है। महाराष्ट्र ₹33.50 लाख करोड़ के औसत AUM के साथ सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है, वहीं दिल्ली, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों ने सालाना सबसे तेज़ ग्रोथ रेट दर्ज की है।
निवेशक मासिक SIP फ्लो डेटा और मिडकैप व स्मॉलकैप कैटेगरीज में नेट इनफ्लो ट्रेंड्स पर नज़र रख सकते हैं। इन मेट्रिक्स का इस्तेमाल इंडस्ट्री द्वारा रिटेल सेंटीमेंट और इक्विटी मार्केट्स में लिक्विडिटी के स्तर का अंदाज़ा लगाने के लिए किया जाता है। इन इनफ्लो में कोई भी महत्वपूर्ण बदलाव, खासकर अगर मार्केट में वोलेटिलिटी (volatility) बढ़ती है, तो इस रिटेल-केंद्रित ग्रोथ की निरंतरता का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर होगा।
