भारतीय म्यूचुअल फंड्स में सितंबर 2026 में **₹32,490 करोड़** का रिकॉर्ड SIP इनफ्लो दर्ज किया गया है। भारी कैश के चलते फंड मैनेजर्स अब छोटे शेयरों के बजाय लार्ज-कैप कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं ताकि लिक्विडिटी बनी रहे।
भारतीय म्यूचुअल फंड सेक्टर ने एक नया मुकाम हासिल किया है। सितंबर 2026 में सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला पैसा ₹32,490 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रिटेल निवेशकों की इस भारी भागीदारी ने फंड मैनेजर्स के पास निवेश के लिए रिकॉर्ड पूंजी जमा कर दी है।
फंड मैनेजर्स की बदलती पसंद
फंड मैनेजर्स अब उन स्टॉक्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहां वे बिना किसी उतार-चढ़ाव के बड़ी रकम लगा सकें। बड़ी फंड हाउस के लिए छोटी कंपनियों में पैसा लगाना जोखिम भरा होता है क्योंकि वहां खरीदारी या बिकवाली से शेयर की कीमत पर असर पड़ता है। यही वजह है कि अब संस्थागत निवेशक उन कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनका मार्केट कैपिटलाइजेशन बड़ा है और जो बाजार में मजबूती बनाए रखती हैं।
आंकड़ों की जुबानी
इस बदलाव का असर लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड्स में साफ दिख रहा है, जहां सितंबर में ₹859 करोड़ का पॉजिटिव नेट इनफ्लो वापस लौटा है। दूसरी ओर, रिटेल निवेशकों का रुझान मिड-कैप (₹7,835 करोड़) और स्मॉल-कैप (₹9,039 करोड़) में अभी भी बना हुआ है, लेकिन बड़े फंड हाउस अब काफी सावधानी बरत रहे हैं।
डेट फंड्स में भारी निकासी का जोखिम
इक्विटी के प्रति इस उत्साह के बीच, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री को एक बड़ी चुनौती का भी सामना करना पड़ रहा है। सितंबर 2026 में पूरे उद्योग से ₹1.33 लाख करोड़ की नेट आउटफ्लो दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण डेट म्यूचुअल फंड्स से ₹1.83 लाख करोड़ की भारी निकासी रही। यह लिक्विडिटी के लिहाज से एक चिंता का विषय है। अब बाजार दो हिस्सों में बंटता दिख रहा है—एक तरफ लार्ज-कैप शेयरों को संस्थागत सपोर्ट मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन का जोखिम बना हुआ है।
