बाजार में उथल-पुथल के बीच म्यूचुअल फंड्स का बड़ा दांव: IT-हेल्थकेयर में रिकॉर्ड निवेश, Financials से हुए बाहर!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
बाजार में उथल-पुथल के बीच म्यूचुअल फंड्स का बड़ा दांव: IT-हेल्थकेयर में रिकॉर्ड निवेश, Financials से हुए बाहर!
Overview

मार्च 2026 में म्यूचुअल फंड्स ने भारतीय इक्विटी मार्केट में रिकॉर्ड तोड़ ₹40,450 करोड़ का निवेश किया है। यह पिछले कई महीनों का सबसे बड़ा इनफ्लो है। हालांकि, खास बात यह है कि इस रिकॉर्ड पैसे को डिफेंसिव और ग्रोथ वाले सेक्टर्स जैसे Healthcare, IT और Telecom में लगाया गया है, जबकि Financials और Cyclical स्टॉक्स से बड़ी बिकवाली हुई है।

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क्यों बदल रही है फंड मैनेजर्स की रणनीति?

यह रिकॉर्ड इनफ्लो ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है, कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू रही हैं और मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट में नरमी देखी जा रही है। इन वजहों से बाजार में अनिश्चितता का माहौल है। ऐसे में, फंड मैनेजर्स आक्रामक ग्रोथ की बजाय सुरक्षा (Safety) को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने Financials और Cyclical सेक्टर्स से पैसा निकालकर उन सेक्टर्स में लगाया है जो आर्थिक मंदी से कम प्रभावित होते हैं और जिनमें लंबी अवधि में ग्रोथ की संभावना है।

रिकॉर्ड निवेश के बावजूद सेक्टर्स में बदलाव

मार्च 2026 में इक्विटी स्कीम्स में कुल ₹40,450 करोड़ का नेट इनफ्लो हुआ, जो फरवरी की तुलना में काफी ज्यादा है और जुलाई 2025 के बाद सबसे बड़ा मासिक आंकड़ा है। वहीं, सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए ₹32,087 करोड़ का इनफ्लो जारी रहा, जो रिटेल निवेशकों की लगातार भागीदारी को दर्शाता है। यह सब तब हुआ जब Nifty 50 इंडेक्स मार्च के महीने में 9.37% गिरा। इससे पता चलता है कि कई निवेशकों ने बाजार की गिरावट को खरीदारी के मौके के तौर पर देखा।

डिफेंसिव सेक्टर्स पर बढ़ा फोकस

फंड मैनेजर्स ने Healthcare और IT जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। Healthcare में सबसे ज्यादा 47 बेसिस पॉइंट्स (bps), IT में 36 bps और Telecom/Media में 24 bps का आवंटन बढ़ाया गया है। इसके अलावा Utilities सेक्टर्स में भी निवेश बढ़ा है। Healthcare में बढ़ती आय, इंश्योरेंस की पहुंच और बुजुर्ग आबादी का बढ़ना ग्रोथ के प्रमुख कारण हैं। IT सेक्टर से स्थिर ग्रोथ की उम्मीद है, भले ही AI की चुनौतियां हों। Telecom सेक्टर स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल और 5G के विस्तार से फायदा उठा रहा है।

Financials और Cyclicals से बड़ी बिकवाली

दूसरी ओर, Financials से फंड्स की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 99 बेसिस पॉइंट्स (bps) घटाई गई। Auto और Industrial स्टॉक्स में भी भारी कटौती की गई। पब्लिक सेक्टर बैंक्स (PSUs) में मार्च में 19.83% की भारी गिरावट आई, जिससे उनमें बिकवाली बढ़ी। Private Banks में भी गिरावट देखी गई। Auto सेक्टर, अच्छी मार्च बिक्री के बावजूद, धीमी ग्रोथ और बढ़ती लागतों का सामना कर रहा है।

लार्ज-कैप और मिड-कैप में अहम कदम

Large Caps में फंड्स ने HDFC Bank, Kotak Mahindra Bank, Bharti Airtel और ICICI Bank जैसे स्टॉक्स खरीदे, जो Private Banking और Telecom में भरोसा दिखाते हैं। वहीं, Power Grid Corporation, IOCL और BPCL जैसी सरकारी कंपनियों में बिकवाली देखी गई, संभवतः प्रॉफिट-बुकिंग के कारण।

Mid-cap फंड्स ने Yes Bank और क्लीन एनर्जी फर्म NTPC Green जैसी चुनिंदा कंपनियों में निवेश किया। NTPC Green ने FY26 के लिए अपनी क्षमता वृद्धि के लक्ष्य को पार कर लिया था। हालांकि,valuation संबंधी चिंताओं के चलते MarketsMOJO ने 30 मार्च 2026 को NTPC Green Energy को 'Sell' रेटिंग दी थी।

बाजार की मौजूदा स्थिति और रणनीति

यह पूरी रणनीति बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों (Brent Crude $110-$112 प्रति बैरल तक पहुंचा) और मैन्युफैक्चरिंग PMI के लगभग 4 साल के निचले स्तर 53.9 पर आने जैसे कारकों को देखते हुए बनाई गई है। Industrial Production (IIP) ग्रोथ में भी नरमी आई है। Inflation (CPI) 3.4% पर बनी हुई है। IMF ने भारत के GDP ग्रोथ का अनुमान FY26-27 के लिए 6.5% लगाया है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बेहतर है, लेकिन वैश्विक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन सब वजहों से फंड मैनेजर्स Cyclical सेक्टर्स से दूर रहने के पक्ष में हैं।

जोखिमों के कारण सेक्टर्स में हुआ बदलाव

Financials और Cyclical स्टॉक्स से दूरी बनाने का मुख्य कारण महत्वपूर्ण जोखिम थे। PSU Banks में 19.83% की बड़ी गिरावट एसेट क्वालिटी और ब्याज दर संवेदनशीलता को लेकर चिंताओं को दर्शाती है। Auto बिक्री भले ही मार्च में मजबूत रही हो, लेकिन बढ़ती लागतों, महंगाई और सतर्क ग्राहकों के कारण आने वाले समय में धीमी ग्रोथ का सामना कर सकती है। मैन्युफैक्चरिंग PMI में गिरावट व्यापक आर्थिक मंदी का संकेत देती है, जो सप्लाई चेन की दिक्कतों से और बढ़ सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल एनर्जी-इंटेंसिव इंडस्ट्रीज और कुल महंगाई को भी प्रभावित कर रहा है, जिससे कई व्यवसायों के लिए मुश्किल माहौल बना है।

प्रमुख सेक्टर्स का भविष्य

कम समय की अस्थिरता के बावजूद, भारत का लंबी अवधि का ग्रोथ आउटलुक घरेलू मांग और सरकारी नीतियों से मजबूत बना हुआ है। विश्लेषकों को IT में स्थिर, मध्यम ग्रोथ और Healthcare और Renewables में मजबूत विस्तार की उम्मीद है, जो नीतिगत समर्थन और मांग से प्रेरित होंगे। 5G के विस्तार के साथ Telecom ब्रांड वैल्यू में और वृद्धि की उम्मीद है। निवेशकों को आने वाली तिमाहियों में भू-राजनीतिक घटनाओं, तेल की कीमतों और Inflation रुझानों पर कड़ी नजर रखनी होगी।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.