Quant Value Fund का कमाल! 3 महीने में दिया **26%** से ज़्यादा रिटर्न, कैटेगरी में टॉप पर

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AuthorAditya Rao|Published at:
Quant Value Fund का कमाल! 3 महीने में दिया **26%** से ज़्यादा रिटर्न, कैटेगरी में टॉप पर

Quant Value Fund ने पिछले 3 महीनों में **26.1%** का शानदार रिटर्न दिया है, जिससे यह वैल्यू म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे आगे निकल गया है।

क्या हुआ?

Quant Value Fund ने पिछले तीन महीनों में 26.1% का जबरदस्त रिटर्न दर्ज किया है। यह फंड वैल्यू-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड कैटेगरी में सबसे अव्वल रहा है। यह प्रदर्शन उन फंड्स के लिए है जिनकी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है। फंड की यह हालिया बढ़त Aditya Birla Sun Life Value Fund (जिसने 15.8% रिटर्न दिया) और HDFC Value Fund (जिसने 13.8% रिटर्न दिया) जैसे प्रतिद्वंद्वियों से काफी आगे है।

लंबी अवधि का प्रदर्शन?

फंड का अच्छा प्रदर्शन सिर्फ पिछले तिमाही तक ही सीमित नहीं है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि एक साल में Quant Value Fund ने 15.9% का रिटर्न दिया है, जबकि इसके बेंचमार्क इंडेक्स का रिटर्न -4.0% रहा। वहीं, तीन साल की अवधि में, फंड ने 23.8% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) बनाए रखा है, जो इसके बेंचमार्क से 14.5 प्रतिशत अंक ज़्यादा है। ये आंकड़े बताते हैं कि फंड की वर्तमान रणनीति ने कई अवधियों में लगातार अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ा है।

वैल्यू फंड्स का संदर्भ

वैल्यू फंड्स उन कंपनियों में निवेश करते हैं जिनके शेयर उनकी असल कीमत से कम पर ट्रेड होते दिखते हैं। ये फंड्स अक्सर कॉन्ट्रारियन (विपरीत) पोजीशन लेते हैं या साइक्लिकल रिकवरी पर दांव लगाते हैं, इसलिए इनका प्रदर्शन सेक्टर-स्पेसफिक रोटेशन और बाज़ार के सेंटिमेंट के प्रति काफी संवेदनशील हो सकता है। इस कैटेगरी के बड़े फंड्स, जैसे Nippon India Value Fund, ₹8,821.2 करोड़ की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं, जो दिखाता है कि टॉप परफॉर्मर्स के बीच स्केल काफी अलग-अलग है।

निवेशक इसे कैसे देखें?

ज़्यादा रिटर्न देने वाले फंड्स का मूल्यांकन करते समय, सिर्फ छोटी अवधि के प्रतिशत लाभ से आगे देखना महत्वपूर्ण है। अलग-अलग फंड मैनेजर्स अलग-अलग एसेट एलोकेशन स्ट्रेटेजी और रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करते हैं। जो फंड एक खास अवधि में ज़्यादा रिटर्न देता है, उसका रिस्क प्रोफाइल भी दूसरों से अलग हो सकता है। परफॉरमेंस रैंकिंग अक्सर चुनी गई समय-सीमा के आधार पर बदलती रहती है, जैसे तीन महीने, छह महीने या एक साल।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

वैल्यू फंड्स में रुचि रखने वाले निवेशकों को फंड के पोर्टफोलियो की जांच करनी चाहिए ताकि यह समझ सकें कि किन सेक्टर्स या किन खास स्टॉक्स ने हालिया प्रदर्शन में योगदान दिया है। एक्सपेंस रेशियो, मैनेजर की इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटेजी की निरंतरता, और बाज़ार में गिरावट के दौरान फंड ने ऐतिहासिक रूप से कैसा प्रदर्शन किया है, यह भी देखना फायदेमंद है। लंबी अवधियों—जैसे पांच या दस साल—में एक सुसंगत बेंचमार्क के मुकाबले फंड के प्रदर्शन की तुलना करना, एक सिंगल हाई-ग्रोथ तिमाही पर ध्यान केंद्रित करने की तुलना में ज़्यादा संतुलित तस्वीर पेश करता है।

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