Quant Mutual Fund के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है। फंड हाउस की 5 स्कीम्स ने पिछले 10 सालों में सालाना 20% से ज़्यादा का SIP रिटर्न दिया है, जो कई दूसरे फंड्स से काफी बेहतर है। इन फंड्स में हर महीने ₹10,000 के निवेश की वैल्यू आज ₹37 लाख से ₹48 लाख तक पहुंच गई है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये फंड्स अक्सर ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) के साथ आते हैं।
Quant Mutual Fund की शानदार परफॉरमेंस
Quant Mutual Fund ने लगातार दमदार प्रदर्शन करते हुए 5 ऐसी स्कीम्स पेश की हैं, जिन्होंने पिछले 10 सालों में अपने-अपने कैटेगरी में सबसे ज़्यादा SIP रिटर्न दिया है। यह डेटा लंबी अवधि तक सिस्टमैटिक तरीके से इक्विटी में निवेश करने की ताकत दिखाता है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो अलग-अलग मार्केट सेगमेंट में वेल्थ क्रिएशन (Wealth Creation) का इतिहास देख रहे हैं।
अलग-अलग कैटेगरी में टॉप परफॉरमेंस
Quant Small Cap Fund Direct ने पिछले 10 सालों में 26.16% का सालाना SIP रिटर्न दिया है, जिससे यह अपनी कैटेगरी में लीडर बन गया है। इस फंड में हर महीने ₹10,000 का निवेश आज लगभग ₹47.66 लाख हो गया है। इसके अलावा, Quant Infrastructure Fund ने 23.81% और Quant Multi Asset Allocation Fund ने 22.79% का सालाना रिटर्न दर्ज किया है। Quant ELSS Tax Saver Fund और Quant Flexi Cap Fund ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए इसी 10-साल की अवधि में क्रमशः 21.88% और 21.32% का रिटर्न दिया है।
निवेश की स्ट्रैटेजी और जोखिम को समझें
हालांकि यह रिटर्न काफी प्रभावशाली है, निवेशकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसके पीछे की स्ट्रैटेजी क्या है। Quant Mutual Fund अपनी क्वांटिटेटिव डेटा-आधारित (Quantitative Data-based) निवेश रणनीति के लिए जाना जाता है, जिसमें स्टॉक और सेक्टर अलॉकेशन (Sector Allocation) के फैसले इसी डेटा के आधार पर लिए जाते हैं। इस वजह से पोर्टफोलियो अक्सर कंसन्ट्रेटेड (Concentrated) होते हैं और टर्नओवर (Turnover) ज्यादा रहता है, जिससे होल्डिंग्स में बार-बार बदलाव हो सकता है।
वित्तीय डेटा बताता है कि ये फंड्स अक्सर अपने कैटेगरी बेंचमार्क (Category Benchmark) से बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न (Risk-Adjusted Return) देते हैं (जो Sharpe Ratio और Sortino Ratio में दिखता है), लेकिन इसके साथ ज्यादा वोलेटिलिटी भी जुड़ी है। ज्यादा वोलेटिलिटी का मतलब है कि निवेश का मूल्य एक स्टैंडर्ड इंडेक्स फंड या अधिक कंज़र्वेटिव (Conservative) पोर्टफोलियो की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से घट-बढ़ सकता है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बातें
इन स्कीम्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को ऐतिहासिक रिटर्न से आगे देखना चाहिए। चूंकि ये फंड्स अक्सर एक्टिव और हाई-कन्विक्शन (High-Conviction) दांव लगाते हैं, इसलिए इनका प्रदर्शन फंड मैनेजमेंट टीम के स्टॉक चुनने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है। साथियों के साथ तुलना करने पर, निवेशक यह देख सकते हैं कि ये फंड्स अक्सर एक अलग रिस्क प्रोफाइल (Risk Profile) बनाए रखते हैं, जिसका मतलब है कि मार्केट में गिरावट आने पर ये उन फंड्स की तुलना में अलग तरह से रिएक्ट कर सकते हैं जो पैसिव (Passive) या बेंचमार्क-फॉलोइंग (Benchmark-following) स्ट्रैटेजी अपनाते हैं।
इन फंड्स को ट्रैक करने वालों के लिए, अगली महत्वपूर्ण बात यह होगी कि फंड हाउस का क्वांटिटेटिव मॉडल अलग-अलग मार्केट साइकिल्स (Market Cycles) में कितनी कंसिस्टेंसी (Consistency) बनाए रखता है। निवेशकों को फंड के लेटेस्ट फैक्ट शीट (Fact Sheet) में टॉप सेक्टर एक्सपोजर (Sector Exposure) या पोर्टफोलियो कंसंट्रेशन (Portfolio Concentration) में आए बदलावों को देखना चाहिए, क्योंकि मार्केट की स्थिति बदलने पर फंड कैसा प्रदर्शन कर सकता है, इसे समझने के लिए ये फैक्टर महत्वपूर्ण हैं।
