Quant Multi Cap Fund ने पिछले 6 महीनों में **7.8%** का दमदार रिटर्न देकर बाजी मारी है। इस अवधि में इसने ICICI Pru Multicap Fund और LIC MF Multi Cap Fund जैसे बड़े खिलाड़ियों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह फंड पिछले एक और तीन सालों में भी अपने बेंचमार्क इंडेक्स को लगातार मात दे रहा है, जो इसकी एक्टिव मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी की ओर इशारा करता है।
6 महीने में सबसे आगे Quant Multi Cap Fund
म्यूचुअल फंड की दुनिया में Quant Multi Cap Fund ने अपनी धाक जमा ली है। 2 जुलाई 2026 को खत्म हुई 6 महीने की अवधि में इस फंड ने 7.8% का शानदार रिटर्न दिया है। इस दौड़ में इसने अपने कई प्रतिद्वंद्वियों को पछाड़ा है। जहां ICICI Pru Multicap Fund ने 5.2% का रिटर्न दिया, वहीं LIC MF Multi Cap Fund 4.8% पर ही सिमट गया। ये आंकड़े ACE MF के हैं और उन फंड्स के लिए हैं जिनका एसेट ₹1,500 करोड़ से ज्यादा है।
बेंचमार्क को लगातार मात
Quant Multi Cap Fund की एक और बड़ी खूबी है अपने बेंचमार्क इंडेक्स से लगातार बेहतर प्रदर्शन करना। पिछले एक साल में, जहां बेंचमार्क इंडेक्स -4.0% का निगेटिव रिटर्न दे रहा था, वहीं इस फंड ने 3.9% का पॉजिटिव रिटर्न दर्ज किया। यानी 7.8% का बड़ा अंतर। यही नहीं, 3 साल की अवधि में भी फंड ने 12.5% का रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क 9.2% पर रहा। यह दिखाता है कि फंड मैनेजमेंट की रणनीति ने बाजार के उन मौकों का फायदा उठाया जिन्हें इंडेक्स भुना नहीं पाया।
अलग-अलग फंड्स की अपनी कहानी
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि मार्केट लीडरशिप हर समय एक जैसी नहीं रहती। Quant Multi Cap Fund भले ही 6 महीने और 3 महीने के प्रदर्शन में आगे हो, लेकिन फंड्स की अपनी-अपनी खासियतें हैं। उदाहरण के लिए, ICICI Pru Multicap Fund 6 महीने के रिटर्न में पीछे रहा, लेकिन इसका कुल एसेट ₹17,675.8 करोड़ है, जो इसे सेक्टर का एक बड़ा और अहम फंड बनाता है। वहीं, एक महीने के सबसे बड़े रिटर्न का ताज LIC MF Multi Cap Fund के 6.6% के नाम रहा, और तीन साल की कैटेगरी में HSBC Multi Cap Fund 20.3% रिटर्न के साथ सबसे आगे था।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
निवेशकों को यह समझना चाहिए कि शॉर्ट-टर्म परफॉरमेंस अक्सर फंड मैनेजर के खास सेक्टर एलोकेशन और एक्टिव ट्रेडिंग का नतीजा होती है। मल्टी-कैप फंड होने के नाते, इन्हें लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करना पड़ता है। ऐसे में, इन तीनों कैटेगरी के शेयरों के परफॉरमेंस का सीधा असर फंड पर पड़ता है। आगे का परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगा कि फंड मैनेजर बाजार के बदलते रुझानों के हिसाब से इन कैटेगरीज़ के बीच अपना एलोकेशन कैसे एडजस्ट करता है। इसलिए, निवेशकों को केवल शॉर्ट-टर्म रिटर्न ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि में परफॉरमेंस की स्थिरता और फंड की वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) पर भी गौर करना चाहिए।
