Quant Multi Asset Allocation Fund ने पिछले 6 महीनों में अपने प्रतिस्पर्धियों को पीछे छोड़ते हुए **5.9%** का शानदार रिटर्न दिया है। जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस फंड ने लंबी अवधि में भी अपने बेंचमार्क रिटर्न से काफी बेहतर प्रदर्शन किया है।
6 महीने में 5.9% रिटर्न
Quant Multi Asset Allocation Fund, जिसकी AUM (Asset Under Management) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है, ने शुरुआती जुलाई तक पिछले छह महीनों में 5.9% का रिटर्न देकर मल्टी-एसेट फंड्स में अपनी टॉप पोजिशन पक्की की है। इसी दौरान Edelweiss Multi Asset Allocation Fund ने 3.7% और WOC Multi Asset Allocation Fund ने 3.5% का रिटर्न दर्ज किया।
लंबी अवधि में भी शानदार परफॉरमेंस
सिर्फ शॉर्ट-टर्म ही नहीं, बल्कि लंबी अवधि में भी फंड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को लगातार पीछे छोड़ा है। एक साल के प्रदर्शन में, फंड ने 18.4% का रिटर्न दिया, जो इसके बेंचमार्क के 5.7% रिटर्न से 12.8 फीसदी अंक ज़्यादा है। तीन साल की अवधि में भी फंड ने 22.8% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया, जो बेंचमार्क के 7.4% रिटर्न से कहीं ज़्यादा है। इससे पता चलता है कि फंड की निवेश रणनीति पिछले कुछ सालों में बाजार की उठापटक के दौरान फायदा उठाने में कामयाब रही है।
फंड रैंकिंग में डायनामिक बदलाव
भले ही Quant Multi Asset Allocation Fund छह महीने और तीन महीने की अवधि में टॉप पर है, लेकिन इस कैटेगरी में लीडरशिप लगातार बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, सबसे हालिया एक महीने के रिटर्न में Nippon India Multi Asset Allocation Fund ने 1.7% का गेन करके कैटेगरी को आउटपरफॉर्म किया। यह दिखाता है कि फंड का परफॉरमेंस समय-सीमा और हर फंड मैनेजर की एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी के आधार पर काफी बदल सकता है।
फंड का साइज़ और मार्केट में मौजूदगी
इस स्पेस के टॉप फंड्स में एसेट साइज़ काफी अलग-अलग है, जो फंड के लिक्विडिटी मैनेजमेंट और इन्वेस्टमेंट को प्रभावित कर सकता है। SBI Multi Asset Allocation Fund के पास ₹19,354.2 करोड़ की सबसे बड़ी एसेट है। वहीं, Quant Multi Asset Allocation Fund ₹5,615.0 करोड़ का कॉर्पस मैनेज करता है, जबकि Nippon India Multi Asset Allocation Fund ₹15,481.1 करोड़ का मैनेजमेंट करता है। निवेशकों को यह भी देखना चाहिए कि अलग-अलग फंड साइज़ मैनेजर की इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसे एसेट क्लास में पोजीशन लेने या बाहर निकलने की क्षमता को कैसे प्रभावित करता है।
आगे, निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि क्या फंड अपने बेंचमार्क के मुकाबले अपनी परफॉरमेंस गैप बनाए रख पाता है। अन्य कारकों में फंड मैनेजर की एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी में कोई बदलाव, ओवरऑल मार्केट की वोलैटिलिटी का फंड की होल्डिंग्स पर असर और आने वाली तिमाहियों में मल्टी-एसेट कैटेगरी के अन्य फंड्स की तुलना में फंड का एक्सपेंस रेशियो शामिल हो सकता है।
