Quant Multi Asset Allocation Fund का कमाल! 3 साल में दिया 21% का शानदार रिटर्न

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AuthorAditya Rao|Published at:
Quant Multi Asset Allocation Fund का कमाल! 3 साल में दिया 21% का शानदार रिटर्न

Quant Multi Asset Allocation Fund ने पिछले 3 सालों में 21% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है, जो इसके बेंचमार्क के 7.2% रिटर्न से कहीं ज़्यादा है। इस दमदार परफॉरमेंस के चलते यह मल्टी-एसेट फंड्स में सबसे आगे निकल गया है।

Quant Fund का जलवा: 3 साल में 21% का तूफानी रिटर्न!

ACE MF के आंकड़ों के मुताबिक, Quant Multi Asset Allocation Fund ने पिछले तीन सालों में 21.0% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। यह रिटर्न इसी अवधि में बेंचमार्क द्वारा दिए गए 7.2% के रिटर्न से काफी ज़्यादा है। यह शानदार परफॉरमेंस फंड की एक्टिव स्ट्रैटेजी का नतीजा है, जिसमें इक्विटी, डेट और गोल्ड जैसे एसेट क्लास में एक्सपोजर को एडजस्ट करके बाजार के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जाता है।

दूसरे बड़े फंड्स से मुकाबला

₹1,500 करोड़ से ज़्यादा की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स में Quant Multi Asset Allocation Fund तीन साल के रिटर्न के मामले में टॉप पर है। वहीं, Nippon India Multi Asset Allocation Fund ने 17.5% CAGR और UTI Multi Asset Allocation Fund ने 15.3% का रिटर्न दिया है। इस रेस में SBI Multi Asset Allocation Fund सबसे बड़ा फंड बना हुआ है, जिसका कॉर्पस ₹19,354.2 करोड़ है।

छोटी अवधि के प्रदर्शन पर एक नज़र

हालांकि, Quant Fund तीन साल की कैटेगरी में भले ही आगे हो, लेकिन छोटी अवधि के प्रदर्शन में कुछ अलग तस्वीर दिखती है। उदाहरण के लिए, UTI Multi Asset Allocation Fund ने एक महीने में 1.8% का रिटर्न देकर टॉप पोजिशन हासिल की है और तीन महीने में भी 3.6% रिटर्न के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है।

यह याद रखना ज़रूरी है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं है। मल्टी-एसेट फंड्स में इक्विटी, डेट इंस्ट्रूमेंट्स और गोल्ड जैसे अंडरलाइंग एसेट्स से जुड़े जोखिम होते हैं, जिनकी अस्थिरता फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, एक्टिव मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी में ऐसे समय भी आ सकते हैं जब फंड मैनेजर का मार्केट आउटलुक असल ट्रेंड से मेल न खाए, जिससे अंडरपरफॉरमेंस हो सकती है।

निवेशकों को केवल सालाना रिटर्न से आगे देखकर फंड के एक्सपेंस रेशियो, पोर्टफोलियो टर्नओवर (कितनी बार फंड मैनेजर एसेट्स खरीदता-बेचता है) और ओवरऑल रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न, जैसे शार्प रेशियो, पर भी नज़र रखनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि रिटर्न स्मार्ट निवेश निर्णयों से आ रहे हैं या ज़्यादा जोखिम उठाने से।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.