Quant Multi Asset Allocation Fund ने पिछले तीन सालों में **21.1%** का ज़बरदस्त कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल कर अपने कैटेगरी में सबको पीछे छोड़ दिया है। यह परफॉरमेंस इसके करीबी प्रतिद्वंद्वियों, Nippon India और WOC, से कहीं आगे है और बेंचमार्क को भी मात देता है।
Detailed Coverage
Quant Fund का जलवा: 3 साल में 21.1% CAGR
ACE MF के आंकड़ों के मुताबिक, Quant Multi Asset Allocation Fund ने 27 जुलाई 2026 को खत्म हुए तीन साल के पीरियड में 21.1% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। यह इस फंड की इक्विटी, डेट और कमोडिटीज़ में बढ़िया डाइवर्सिफिकेशन (Diversification) की क्षमता को दिखाता है, जिससे यह उतार-चढ़ाव वाले मार्केट में भी अच्छा कर रहा है।
पियर ग्रुप (Peer Group) से मुकाबला
Quant Fund का यह प्रदर्शन तब और भी खास हो जाता है जब इसकी तुलना उसी कैटेगरी के दूसरे फंड्स से की जाती है। Nippon India Multi Asset Allocation Fund ने इसी तीन साल की अवधि में 17.8% का CAGR दर्ज किया, जबकि WOC Multi Asset Allocation Fund 15.3% पर रहा। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इस दौरान फंड के बेंचमार्क ने सिर्फ 7.2% का रिटर्न दिया। एक साल की छोटी अवधि में भी Quant Multi Asset Allocation Fund ने अपने बेंचमार्क से 12.8% ज़्यादा रिटर्न देकर अपनी पकड़ मजबूत रखी है।
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स को समझना
मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स का मकसद निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास (Asset Class) में बांटकर जोखिम को कम करना होता है। यानी, अगर एक एसेट क्लास जैसे इक्विटी में गिरावट आती है, तो दूसरे एसेट क्लास जैसे सोना या डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) में हुए फायदे से उसकी भरपाई हो सकती है। अभी ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट बेस वाले फंड्स पर फोकस किया गया है। इस ग्रुप में, SBI Multi Asset Allocation Fund ₹19,354.2 करोड़ के Corpus के साथ सबसे बड़ा फंड है।
निवेशकों के लिए ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि 21.1% जैसा लंबा-चौड़ा CAGR पिछले प्रदर्शन का साफ संकेत देता है, निवेशकों को याद रखना चाहिए कि पिछला रिटर्न भविष्य की गारंटी नहीं होता। ऐसे फंड्स की स्ट्रैटेजी फंड मैनेजर की अलग-अलग एसेट क्लास के बीच सही समय पर एलोकेशन करने की क्षमता पर निर्भर करती है। जहां Quant ने तीन साल के पीरियड में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं WOC Multi Asset Allocation Fund जैसे कुछ दूसरे फंड्स ने एक महीने और तीन महीने जैसी छोटी अवधि में भी अच्छी परफॉरमेंस दिखाई है। ऐसे फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशकों को फंड के पोर्टफोलियो, मैनेजमेंट टीम की स्थिरता और बाज़ार के उतार-चढ़ाव के मुकाबले उसके रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न (Risk-Adjusted Returns) को ट्रैक करना चाहिए।
