Quant Mutual Fund की नई रणनीति: ग्लोबल AI से किनारा, अब भारतीय घरेलू थीम पर बड़ा दांव

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AuthorNeha Patil|Published at:
Quant Mutual Fund की नई रणनीति: ग्लोबल AI से किनारा, अब भारतीय घरेलू थीम पर बड़ा दांव

Quant Mutual Fund ने ग्लोबल AI सेक्टर से दूरी बनाते हुए भारतीय बाजार पर फोकस शिफ्ट किया है। ओवरवैल्यूएशन के डर से फंड हाउस अब बैंकिंग और रियल एस्टेट जैसे अंडर-रिसर्च सेक्टरों में संभावनाएं तलाश रहा है। कंपनी का AUM अब **₹1 लाख करोड़** के पार पहुंच चुका है।

Quant Mutual Fund ने अपनी इन्वेस्टमेंट स्ट्रेटजी में बड़ा बदलाव करते हुए ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम से बाहर निकलने का फैसला किया है। फंड हाउस का मानना है कि यह ट्रेड अब बहुत ज्यादा 'ओवरक्राउडेड' हो चुका है। साल 2023 से अब तक Amazon, Microsoft और Meta जैसी कंपनियों ने AI इंफ्रास्ट्रक्चर में $1 ट्रिलियन से ज्यादा का निवेश किया है, जिससे ग्लोबल पोर्टफोलियो के लिए वैल्युएशन का बड़ा रिस्क पैदा हो गया है।

AI से दूरी क्यों?

मैनेजमेंट का मानना है कि AI सेक्टर में पहले ही बहुत ज्यादा पैसा आ चुका है, जिससे वैल्युएशन इतने बढ़ गए हैं कि लंबे समय में अच्छे रिटर्न की उम्मीद कम है। अब Quant का फोकस 'बॉटम-अप' स्टॉक सिलेक्शन पर है, जहां वे मार्केट ट्रेंड्स के पीछे भागने के बजाय उन कंपनियों को चुन रहे हैं जिनके फंडामेंटल्स मजबूत हैं लेकिन जिन पर अभी तक बड़े निवेशकों की नजर नहीं गई है।

भारत की घरेलू ग्रोथ पर दांव

अब फंड हाउस का पूरा ध्यान उन सेक्टरों पर है जो भारत की घरेलू खपत और इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करते हैं। इसमें बैंकिंग, रियल एस्टेट, कंजम्पशन और इंडस्ट्रियल सेक्टर प्रमुख हैं। इसके अलावा, टेलीकॉम, फार्मा और ऑटो कंपोनेंट्स में भी कंपनी का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है, ताकि मार्केट इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया जा सके।

अर्निंग्स और इम्पोर्ट रिस्क

भारतीय बाजार पर फंड का भरोसा मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों से आता है। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही में Nifty इंडेक्स की अर्निंग्स में 14% की ग्रोथ देखी गई, जबकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स ने क्रमशः 27% और 38% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की।

हालांकि, फंड हाउस ने कुछ स्ट्रक्चरल रिस्क की भी चेतावनी दी है। कच्चा तेल और फर्टिलाइजर जैसे कमोडिटी इम्पोर्ट पर निर्भरता भारतीय कंपनियों के मुनाफे (Margins) पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, महंगाई का असर सेंट्रल बैंक के इंटरेस्ट रेट फैसलों पर भी पड़ सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या यह डोमेस्टिक-फोर्स्ड रणनीति ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता और इम्पोर्ट कॉस्ट के दबाव के बीच भी शानदार रिटर्न दे पाती है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.