निवेशकों के बीच पैसिव फंड्स को सुरक्षित और आसान माना जाता है, लेकिन इनमें 'एसेट एलोकेशन ड्रिफ्ट' और 'स्टॉक ओवरलैप' जैसे छुपे हुए जोखिम होते हैं। इन पैटर्न को न समझने पर आपका पोर्टफोलियो अनचाही अस्थिरता का शिकार हो सकता है।
पैसिव म्यूचुअल फंड इन्वेस्टिंग, जिसमें इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) शामिल हैं, को अक्सर धन बनाने का एक सरल और सस्ता तरीका माना जाता है। हालांकि, इन रणनीतियों के लिए भी एक्टिव मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। निवेशक अक्सर इन्हें 'सेट-एंड-फॉरगेट' (एक बार निवेश कर भूल जाने वाली) स्कीम समझते हैं, लेकिन दो बड़े फैक्टर—एसेट एलोकेशन ड्रिफ्ट और पोर्टफोलियो ओवरलैप—बिना जानकारी के आपके निवेश का जोखिम प्रोफाइल बदल सकते हैं।
एसेट एलोकेशन ड्रिफ्ट की खामोश समस्या
एसेट एलोकेशन किसी भी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी की नींव होता है। उदाहरण के लिए, एक निवेशक ग्रोथ और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने के लिए 60% इक्विटी और 40% डेट या लिक्विड फंड्स में निवेश शुरू करता है। समय के साथ, यदि शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है, तो इक्विटी का हिस्सा बढ़ जाता है, जबकि डेट हिस्सा स्थिर रहता है।
बिना समय-समय पर रीबैलेंसिंग (Rebalancing) किए, यह पोर्टफोलियो ड्रिफ्ट हो सकता है। आपका शुरुआती 60:40 का अनुपात बाजार की तेजी के बाद 70:30 या 80:20 तक बदल सकता है। हालांकि, यह बुल मार्केट में मुनाफा तो बढ़ा सकता है, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि आप अपनी योजना से कहीं ज्यादा जोखिम उठा रहे हैं। बाजार में गिरावट के समय, ऐसा पोर्टफोलियो आपको बड़ी चोट दे सकता है।
ओवरलैप का जाल और डाइवर्सिफिकेशन
एक और आम गलतफहमी यह है कि कई म्यूचुअल फंड स्कीम रखने से पोर्टफोलियो अपने आप डाइवर्सिफाई हो जाता है। निवेशक अक्सर लार्ज-कैप इंडेक्स फंड, फ्लेक्सी-कैप फंड और सेक्टर-स्पेसिफिक फंड रखते हैं, यह सोचकर कि उनका पैसा अलग-अलग जगह फैला है।
लेकिन कई भारतीय म्यूचुअल फंड्स में टॉप-परफॉर्मिंग लार्ज-कैप कंपनियों के शेयर एक जैसे होते हैं। यदि आपके पास 5-6 ऐसे फंड हैं जिनमें टॉप 10 होल्डिंग्स एक ही हैं, तो आपका पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाई नहीं है, बल्कि आप चुनिंदा कंपनियों में जरूरत से ज्यादा कंसंट्रेटेड (Concentrated) हैं। अगर उन कंपनियों या सेक्टर में कोई क्राइसिस आता है, तो आपका पूरा पोर्टफोलियो एक साथ गिरेगा।
पोर्टफोलियो की सेहत कैसे जांचें?
निवेशक अक्सर केवल सालाना रिटर्न पर ध्यान देते हैं, लेकिन असली हेल्थ चेक अंडरलाइंग होल्डिंग्स (Underlying holdings) को देखकर होता है। बार-बार शेयर खरीदने-बेचने से एग्जिट लोड और टैक्स की समस्या हो सकती है, इसलिए बेहतर है कि आप अपने भविष्य के निवेश प्रवाह (Capital flows) को एडजस्ट करें। उदाहरण के लिए, यदि इक्विटी हिस्सा बहुत ज्यादा बढ़ गया है, तो नई एसआईपी (SIP) को डेट या हाइब्रिड फंड्स में डायवर्ट करें। अपने निवेश को नियमित रूप से मॉनिटर करें ताकि आपका पैसिव निवेश अनजाने में हाई-रिस्क बेट न बन जाए।
