जुलाई 2026 में पैसिव फंड्स में निवेशकों का पैसा आना धीमा हो गया। जून के ₹16,724 करोड़ की तुलना में जुलाई में यह निवेश घटकर ₹12,517 करोड़ रह गया। हालांकि, मुनाफावसूली के चलते सिल्वर और गोल्ड ETFs में थोड़ी नरमी दिखी, लेकिन SIP के जरिए निवेश मजबूत बना रहा, जो बाजार की अस्थिरता के बीच भी निवेशकों के अनुशासित रहने का संकेत देता है।
पैसिव फंड्स में निवेश क्यों घटा?
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) जैसे पैसिव निवेश साधनों में जुलाई 2026 में कुल ₹12,517 करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। यह जून के ₹16,724 करोड़ की तुलना में 25.1% की गिरावट दर्शाता है। यह नरमी एक बड़े रुझान का हिस्सा है, क्योंकि इसी महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड उद्योग में भी नेट इनफ्लो में लगभग 15% की कमी देखी गई थी।
कीमती धातुओं के ETFs में मुनाफावसूली
साल की शुरुआत से ही चर्चा में रहे प्रीशियस मेटल ETFs (कीमती धातुओं पर आधारित) में जुलाई के महीने में खास बदलाव देखने को मिला। खासकर सिल्वर ETFs में इनफ्लो घटकर ₹1,285 करोड़ रह गया, जबकि जून में यह ₹4,286 करोड़ के ऊंचे स्तर पर था। यह गिरावट चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बाद आई है, जिससे निवेशकों ने मुनाफे पर बुकिंग की। गोल्ड ETFs में भी जुलाई में इनफ्लो कम होकर ₹1,559 करोड़ रहा। सोने में निवेश का आकर्षण वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते अभी भी बना हुआ है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि हालिया मूल्य वृद्धि के कारण कई निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी कम की है या मुनाफा कमाया है।
SIP का मजबूत सहारा
हालांकि, लम्प-सम (एकमुश्त) और ETF-आधारित निवेश में कमी आई है, लेकिन रिटेल निवेशकों का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए बाजार में निवेश का भरोसा अब भी मजबूत है। जुलाई 2026 में SIP के जरिए ₹31,961 करोड़ का योगदान आया। यह दिखाता है कि भारतीय निवेशक नियमित और अनुशासित निवेश को अभी भी प्राथमिकता दे रहे हैं। SIP फ्लो में यह मजबूती अक्सर तब काम आती है जब खास ETF श्रेणियों में बड़े संस्थागत या सामरिक प्रवाह में उतार-चढ़ाव होता है।
फंड हाउसेज का विस्तार और AUM
निवेश में नरमी के बावजूद, फंड हाउसेज ने अपने उत्पाद (प्रोडक्ट्स) का विस्तार जारी रखा। जुलाई में 16 नए पैसिव स्कीम्स लॉन्च की गईं, जिनसे लगभग ₹507 करोड़ जुटाए गए, जबकि जून में 7 स्कीम्स लॉन्च हुई थीं। लॉन्च की संख्या बढ़ने के बावजूद, पैसिव फंड्स की कुल संपत्ति (AUM) में मामूली 2% की वृद्धि हुई और यह ₹15.61 लाख करोड़ तक पहुंच गई।
आगे क्या?
निवेशकों के लिए, यह डेटा कमोडिटी-आधारित ETFs के मूल्यांकन पर नजर रखने के महत्व को रेखांकित करता है। जब कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच जाती हैं तो मुनाफावसूली एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। भविष्य में, निवेशक सोने और चांदी की कीमतों पर वैश्विक संकेतों, जैसे कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां और अमेरिकी डॉलर के मूल्य में बदलाव, पर नजर रख सकते हैं। इसके अलावा, SIP इनफ्लो के रुझानों की निरंतर निगरानी से यह समझने में मदद मिलेगी कि बाजार की मौजूदा अस्थिरता के बीच रिटेल निवेशकों का भरोसा स्थिर रहता है या नहीं।
