PSU Mutual Funds: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 3 और 5 साल में दिया 25% से ज़्यादा का बम्पर रिटर्न

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AuthorNeha Patil|Published at:
PSU Mutual Funds: निवेशकों की बल्ले-बल्ले! 3 और 5 साल में दिया 25% से ज़्यादा का बम्पर रिटर्न

पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) म्यूचुअल फंड्स ने बाकी सभी थीमैटिक कैटेगरीज को पीछे छोड़ दिया है। पिछले 3 सालों में इन फंड्स ने औसतन **27.51%** सालाना रिटर्न दिया है, जबकि 5 सालों का आंकड़ा **25.01%** है। सरकारी खर्चों और PSU बैंकों के सुधरते प्रदर्शन ने इस तेजी को हवा दी है। हालांकि, निवेशकों को लंबी अवधि के लिए इन फंड्स में निवेश करने से पहले पॉलिसी पर निर्भरता और बढ़ी हुई वैल्यूएशन्स के रिस्क का मूल्यांकन ज़रूर करना चाहिए।

क्या हुआ?

पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) म्यूचुअल फंड्स ने हाल के वर्षों में थीमैटिक फंड्स के बीच टॉप परफॉर्मर बनकर उभरे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन फंड्स ने पिछले तीन सालों में औसतन 27.51% का एनुअलाइज्ड रिटर्न (CAGR) दिया है, और पिछले पांच सालों में यह 25.01% रहा है। यह प्रदर्शन एनर्जी, फार्मा और आईटी जैसे अन्य प्रमुख थीमैटिक कैटेगरीज से काफी बेहतर है।

ग्रोथ के पीछे के कारण?

इस जोरदार प्रदर्शन का मुख्य श्रेय खास पॉलिसी और आर्थिक बदलावों को जाता है। रेलवे, सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) ने कई सरकारी कंपनियों के लिए एक मजबूत सहारा (tailwind) का काम किया है। इसके अलावा, जो PSU बैंक पहले एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की समस्याओं से जूझ रहे थे, उन्होंने मुनाफे में काफी सुधार किया है, जिसका सीधा असर उनके शेयर की कीमतों पर पड़ा है। इतना ही नहीं, ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल ने डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण (indigenisation) को तेज़ किया है, जिसके चलते डिफेंस से जुड़ी PSU कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिले हैं।

थीम का फैक्टर

निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि यह प्रदर्शन फंड मैनेजर्स की स्टॉक चुनने की क्षमता से ज़्यादा, एक ब्रॉड थीम (Broad Theme) के कारण रहा। पिछले पांच सालों में सबसे अच्छा और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले PSU फंड्स के बीच का अंतर महज़ 1.22% पॉइंट्स का रहा। इससे पता चलता है कि PSU सेगमेंट में आई यह तेजी किसी खास फंड मैनेजर के स्किल का नतीजा न होकर, एक लहर की तरह थी जिसने सभी को ऊपर उठाया।

लॉन्ग-टर्म मार्केट लीडरशिप

हालांकि PSU फंड्स अभी सबसे आगे हैं, लेकिन इतिहास बताता है कि थीमैटिक लीडरशिप अक्सर साइक्लिकल (Cyclical) होती है। उदाहरण के लिए, दस साल के होराइज़न (Horizon) पर, एनर्जी फंड्स ऐतिहासिक रूप से 17.14% CAGR के साथ आगे रहे हैं, इसके बाद 16.55% के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर और 16.43% के साथ PSU फंड्स रहे हैं। यह आंकड़ा निवेशकों को याद दिलाता है कि सेक्टर का आउटपरफॉर्मेंस (Outperformance) लंबे समय में बदलता रहता है, और PSU में वर्तमान तेजी स्थायी नहीं हो सकती है।

रिस्क और ध्यान देने योग्य बातें

जहां रिटर्न आकर्षक हैं, वहीं PSU फंड्स में कुछ खास रिस्क भी जुड़े हैं। सबसे बड़ा रिस्क कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) है, क्योंकि ये पोर्टफोलियो सरकारी कंपनियों तक ही सीमित होते हैं। इससे वे सरकारी पॉलिसी में बदलाव, पब्लिक स्पेंडिंग साइकिल्स (Public Spending Cycles) और जियोपॉलिटिकल डेवलपमेंट (Geopolitical Developments) के प्रति बेहद संवेदनशील हो जाते हैं। इसके अलावा, इनमें से कई स्टॉक्स साइक्लिकल होते हैं, जिसका मतलब है कि उनका प्रदर्शन अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है। एक लंबी तेजी के बाद, कुछ निवेशकों को वैल्यूएशन्स (Valuations) ज़्यादा खिंची हुई लग सकती है, और यह कैटेगरीज अक्सर डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स (Diversified Equity Funds) की तुलना में ज़्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) दिखाती है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

फाइनेंशियल एडवाइजर्स (Financial Advisors) अक्सर सुझाव देते हैं कि PSU फंड्स जैसे थीमैटिक फंड्स को एक बड़े, डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के एक छोटे हिस्से ('सैटेलाइट' एलोकेशन) के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि कोर इन्वेस्टमेंट (Core Investment) के रूप में। इस स्पेस में रुचि रखने वाले निवेशकों को अपने रिस्क टॉलरेंस (Risk Tolerance) और टाइम होराइज़न (Time Horizon) का आकलन करना चाहिए, जो आमतौर पर 5 से 7 साल का सुझाया जाता है। नए निवेशक या जो स्थिर, कम-जोखिम वाला ग्रोथ चाहते हैं, उन्हें ये फंड्स ब्रॉड मार्केट इंडेक्स (Broad Market Indices) की तुलना में बहुत ज़्यादा वोलेटाइल लग सकते हैं।

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