बाजार में गिरावट के बावजूद Parag Parikh Flexi Cap Fund ने अपने अमेरिकी टेक पोर्टफोलियो को नहीं बदला है। फंड मैनेजमेंट का जोर तिमाही नतीजों के बजाय लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर है, हालांकि रेगुलेटरी लिमिट्स के चलते निवेश के फैसले सीमित हैं।
लगभग ₹1.45 लाख करोड़ का एसेट मैनेजमेंट संभालने वाला Parag Parikh Flexi Cap Fund अपनी मौजूदा रणनीति पर कायम है। Alphabet, Microsoft, Meta और Amazon जैसे दिग्गज टेक शेयरों में हालिया गिरावट के बावजूद फंड मैनेजर ने अपनी होल्डिंग में कोई बदलाव नहीं किया है।\n\n### क्या है चिंता की असली वजह?\n\nमार्केट में इस वक्त चिंता का मुख्य कारण डेटा सेंटर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किया जा रहा भारी-भरकम खर्च है। हालांकि कुछ निवेशक इसे फ्यूचर प्रॉफिट पर दबाव मान रहे हैं, लेकिन फंड की रिसर्च टीम का मानना है कि इन कंपनियों का कैश फ्लो अभी भी मजबूत है और इनका कोर बिजनेस कॉम्पिटिटिव एडवांटेज आज भी बरकरार है।\n\n### फंड की स्ट्रैटेजी में बदलाव\n\nसाल 2026 के दौरान फंड ने एक सक्रिय रुख अपनाया है। साल की शुरुआत में फंड में कैश होल्डिंग्स काफी ज्यादा थी, लेकिन साल के अंत तक इसे घटाकर सिंगल-डिजिट प्रतिशत पर ला दिया गया है। इससे साफ है कि फंड मैनेजर मार्केट में मौके तलाश रहे हैं और कैश पर बैठने के बजाय निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\n### निवेशकों के लिए चेतावनी और रिस्क\n\nनिवेशकों को कुछ जरूरी बातों पर गौर करना चाहिए:\n\n1. रेगुलेटरी लिमिट्स: SEBI के विदेशी निवेश नियमों के चलते फंड के पास नए इंटरनेशनल निवेश की गुंजाइश कम है। लिहाजा, मौजूदा पोर्टफोलियो में बदलाव सिर्फ प्राइस मूवमेंट और डिविडेंड के जरिए ही हो रहा है।\n2. लार्ज-कैप कंसंट्रेशन: फंड का बड़ा हिस्सा चुनिंदा लार्ज-कैप कंपनियों में है। अगर टेक सेक्टर में लंबे समय तक दबाव रहता है, तो इसका असर फंड की परफॉर्मेंस पर गहरा पड़ सकता है।\n3. हाई-रिस्क स्कीम: यह एक हाई-रिस्क इक्विटी स्कीम है। मैनेजमेंट का साफ कहना है कि उनका मकसद मार्केट टाइमिंग करना नहीं, बल्कि क्वालिटी बिजनेस को लंबे समय तक होल्ड करना है। फंड की सफलता अब क्लाउड कंप्यूटिंग और AI सेवाओं की लॉन्ग-टर्म डिमांड पर टिकी है।
