क्यों इक्विटी में ज्यादा निवेश कर रहा है फंड?
फंड मैनेजमेंट ने अब खाली पड़े कैश को निकालकर इक्विटी में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इक्विटी एक्सपोजर मार्च 2026 में 77.34% से बढ़कर अप्रैल 2026 तक 80.39% हो गया है। इस कदम से संकेत मिलता है कि फंड मैनेजरों को अब स्टॉक मार्केट में वैल्यू नजर आ रही है। फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी बढ़कर ₹1.40 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है।
पोर्टफोलियो में क्या हुए बदलाव?
फंड ने इस दौरान आर्बिट्रेज पोजीशन (Arbitrage Positions) को खत्म करके कैश जुटाया, जिसका इस्तेमाल सीधे स्टॉक्स (Stocks) में निवेश के लिए किया गया। डोमेस्टिक इक्विटी होल्डिंग्स (Domestic Equity Holdings) बढ़कर 68.59% हो गई हैं। फंड ने ITC, Infosys, TCS, और Bajaj Holdings जैसी बड़ी कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाया है।
इसके अलावा, फंड ने Indraprastha Gas Limited (IGL) को एक नई होल्डिंग के तौर पर अपने पोर्टफोलियो में जोड़ा है, जबकि Balkrishna Industries से एग्जिट (Exit) कर लिया है। IGL का स्टॉक फिलहाल 16.52x की अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इसका पीयर (Peer) Petronet LNG 10.5x पर है।
इंटरनेशनल स्टॉक्स और जोखिम (Risks)
इंटरनेशनल इक्विटी होल्डिंग्स 11.8% तक बढ़ी है, जिसमें Alphabet (PE: ~30.57x) और Microsoft (PE: ~24.5x) जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, यह सब SEBI द्वारा तय की गई विदेशी निवेश सीमा (Overseas Investment Limit) के करीब पहुंचने के बावजूद हो रहा है।
फंड के पास अभी भी 15.51% का 'डिप्लॉयबल बफर' (Deployable Buffer) कैश, डेट (Debt) और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में है, जो मार्च में 18.94% था। फंड ने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) में आवंटन बढ़ाकर 4.1% कर दिया है। डेट सेगमेंट में, फंड ने स्टेट डेवलपमेंट लोंस (SDLs) जैसे तमिलनाडु और तेलंगाना के लोन्स में निवेश किया है, जहां यील्ड (Yield) सरकारी बॉन्ड से ज्यादा है।
मैनेजमेंट का बढ़ा हुआ भरोसा
फंड के स्पॉन्सर (Sponsor) ने अपना निवेश ₹40.08 करोड़ बढ़ाकर ₹595.42 करोड़ कर दिया है, जो फंड की दिशा में मैनेजमेंट के मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
बाजार में कुछ जोखिम भी बने हुए हैं। अगर बाजार में तेजी आती है, तो ज्यादा कैश होल्डिंग्स से चूक होने की संभावना है। Balkrishna Industries से बाहर निकलना भी चर्चा का विषय है, खासकर अगर कंपनी के फंडामेंटल मजबूत बने रहते हैं। इसके अलावा, Alphabet और Microsoft जैसी कंपनियों के हाई PE रेश्यो (High P/E Ratios) यह बताते हैं कि निवेशकों की उम्मीदें बहुत ज्यादा हैं, जिन्हें पूरा करना मुश्किल हो सकता है।
