PPFAS Fund Performance: क्या फंड के साइज़ की वजह से हुआ अंडरपरफॉरमेंस? CIO ने बताई असली वजह!

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
PPFAS Fund Performance: क्या फंड के साइज़ की वजह से हुआ अंडरपरफॉरमेंस? CIO ने बताई असली वजह!

PPFAS Mutual Fund के CIO, Rajeev Thakkar ने Parag Parikh Flexi Cap Fund के हालिया प्रदर्शन पर उठे सवालों का जवाब दिया है। पिछले साल जहां फंड ने सिर्फ **0.4%** का रिटर्न दिया, वहीं कैटेगरी का औसत **7%** रहा। Thakkar का कहना है कि फंड का बड़ा एसेट साइज़ इसकी वजह नहीं है, बल्कि फंड की खास इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ही जिम्मेदार है।

PPFAS Mutual Fund के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO), Rajeev Thakkar ने निवेशकों के मन में Parag Parikh Flexi Cap Fund के प्रदर्शन को लेकर चल रही चिंताओं पर अपनी बात रखी है। यूनिट होल्डर्स को लिखे एक नोट में, Thakkar ने इस आम धारणा को चुनौती दी है कि फंड का बड़ा एसेट बेस ही उसके हालिया अंडरपरफॉरमेंस का मुख्य कारण है। पिछले एक साल में फंड का रिटर्न लगभग 0.4% रहा है, जो कि कैटेगरी के 7% के औसत से काफी कम है।

साइज़ नहीं, स्ट्रैटेजी है कारण?

मार्केट के कई जानकार अक्सर यह दलील देते हैं कि जब कोई म्यूचुअल फंड बहुत बड़ा हो जाता है, तो मैनेजर्स के लिए अपनी स्ट्रैटेजी को प्रभावी ढंग से लागू करना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, Thakkar ने फंड के हालिया प्रदर्शन में अंतर के लिए केवल एसेट साइज़ को जिम्मेदार ठहराना गलत बताया। उन्होंने 2007 के अपने एक अनुभव को साझा करते हुए कहा कि तब उन्होंने एक बहुत छोटे पोर्टफोलियो का प्रबंधन किया था, लेकिन मुश्किल बाजार में उसमें भी भारी गिरावट देखी गई थी।

फंड की फिलॉसफी और रिटर्न

Thakkar ने इस बात पर जोर दिया कि फंड की इनवेस्टमेंट फिलॉसफी ऐसे स्टॉक्स को चुनने की है जो फिलहाल ब्रॉड मार्केट की नज़रों से बाहर (out of favor) हों। यह कॉन्ट्रैरियन (contrarian) अप्रोच स्वभाव से ही शॉर्ट-टर्म में फंड को कम आकर्षक बना सकती है, खासकर तब जब पॉपुलर सेक्टर्स में तेजी आ रही हो। उन्होंने स्वीकार किया कि ऐसे दौर आएंगे—चाहे वो तीन महीने, एक साल, या उससे भी लंबे हों—जब फंड द्वारा रखे गए स्टॉक्स की कीमत बढ़ेगी नहीं, या शायद गिर भी सकती है।

Thakkar के अनुसार, इस स्ट्रैटेजी में धैर्य की आवश्यकता है, न कि फंड साइज़ को लेकर तुरंत जवाब ढूंढने की। उनका मानना है कि फोकस रिस्क-रिवॉर्ड असेसमेंट के आधार पर लॉन्ग-टर्म के अवसरों की पहचान करने पर बना हुआ है, न कि ऐसे मार्केट ट्रेंड्स का पीछा करने पर जो अस्थायी हो सकते हैं।

कैश डिप्लॉयमेंट और मार्केट आउटलुक

निवेशक अक्सर किसी फंड में रखे कैश की मात्रा पर नज़र रखते हैं, क्योंकि यह मार्केट वैल्यूएशन पर मैनेजर के नज़रिए को दर्शाता है। हाल के वर्षों में, फंड ने अपने कैश होल्डिंग्स को बढ़ाया था, जो 2024 में लगभग 25% के शिखर पर पहुंच गया था। अगस्त 2026 तक, इन कैश लेवल्स को घटाकर लगभग 14-15% कर दिया गया है। यह बदलाव बताता है कि फंड मैनेजर को पिछले दौर की तुलना में मौजूदा मार्केट वैल्यूएशन पर अधिक इनवेस्टमेंट के अवसर मिल रहे हैं।

हालांकि कैश में यह कमी फंड्स के सक्रिय डिप्लॉयमेंट को दर्शाती है, लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि out-of-favor स्टॉक्स में निवेश में स्वाभाविक जोखिम होता है। यदि इन विशिष्ट सेक्टर्स के लिए बाजार की स्थितियां बेहतर नहीं होती हैं, या यदि ब्रॉड मार्केट में वैल्यूएशन ऊंचे बने रहते हैं, तो फंड का प्रदर्शन शॉर्ट-टर्म में कैटेगरी के औसत से विचलित हो सकता है। निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी यह होगी कि जैसे-जैसे बाजार का माहौल विकसित होता है, फंड की वर्तमान इनवेस्टमेंट बेट्स कितनी प्रभावी साबित होती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.