म्यूचुअल फंड: जुलाई में कॉर्पोरेट टैक्स के बाद Overnight और Liquid Funds में बंपर पैसा आया, असेट्स ₹1.21 लाख करोड़ पार

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AuthorMehul Desai|Published at:
म्यूचुअल फंड: जुलाई में कॉर्पोरेट टैक्स के बाद Overnight और Liquid Funds में बंपर पैसा आया, असेट्स ₹1.21 लाख करोड़ पार

भारतीय म्यूचुअल फंड की दुनिया में जुलाई 2026 में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। Overnight फंड्स की असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में **51.3%** की जोरदार उछाल आई, जो **₹1.21 लाख करोड़** तक पहुँच गई। यह उछाल हाल ही में टैक्स भरने के सीजन के बाद कंपनियों द्वारा अपने पैसे को वापस इन फंड्स में लगाने का नतीजा है। साथ ही, इंटरेस्ट रेट्स को लेकर अनिश्चितता के चलते बड़े निवेशक भी शॉर्ट-टर्म इंस्ट्रूमेंट्स को तरजीह दे रहे हैं।

टैक्स के बाद बाज़ार में लौटी रौनक

भारतीय म्यूचुअल फंड सेक्टर में जुलाई 2026 में शॉर्ट-टर्म डेट कैटेगरी में शानदार रिकवरी देखी गई। कॉर्पोरेट खजाने (corporate treasuries) ने टैक्स सीजन खत्म होने के बाद अपनी लिक्विडिटी को इन फंड्स में फिर से लगाया। Overnight और Liquid फंड्स, जो मुख्य रूप से बड़े इंस्टीट्यूशनल और कॉर्पोरेट निवेशकों को सेवा देते हैं, ने भारी इनफ्लो देखा, जिसने मई और जून के आउटफ्लो को पलट दिया।

Overnight और Liquid फंड्स में कितना आया पैसा?

जुलाई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि Overnight फंड्स की असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 51.3% का जबरदस्त इजाफा हुआ और यह ₹1.21 लाख करोड़ पर पहुँच गई। वहीं, Liquid फंड्स की असेट्स 21.5% बढ़कर ₹6.94 लाख करोड़ हो गई। इस तेजी की बदौलत, टोटल डेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी ने ₹1.87 लाख करोड़ का नेट इनफ्लो दर्ज किया, जो पिछले दो महीनों के ₹2.06 लाख करोड़ के आउटफ्लो से एक बड़ा उलटफेर है। इस पैसे के आने से भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल असेट्स जुलाई के अंत तक रिकॉर्ड ₹85.76 लाख करोड़ के पार पहुंच गई।

क्यों हुआ ये बदलाव?

इस बड़े बदलाव का मुख्य कारण कंपनियों के कैश मैनेजमेंट का यह सालाना चक्र है। बड़ी कंपनियां आमतौर पर फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में एडवांस टैक्स भरने के लिए इन लिक्विड इंस्ट्रूमेंट्स से पैसा निकाल लेती हैं। टैक्स पेमेंट हो जाने के बाद, यह अतिरिक्त नकदी बैंकिंग सिस्टम में वापस आती है और फिर शॉर्ट-टर्म म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेशित हो जाती है। जून में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में हुई बढ़ोतरी इस बड़े कॉर्पोरेट मनी मूवमेंट का सबूत है।

ब्याज दरों की अनिश्चितता का असर

सीजनल टैक्स चक्र के अलावा, मौजूदा आर्थिक माहौल के कारण इंस्टीट्यूशनल निवेशक शॉर्ट-ड्यूरेशन वाले प्रोडक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इंटरेस्ट रेट्स की दिशा को लेकर लगातार बनी हुई अनिश्चितता, साथ ही क्रूड ऑयल की कीमतों में अस्थिरता जैसे ग्लोबल मैक्रोइकॉनॉमिक दबावों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। Overnight और Liquid फंड्स में निवेश करके, ये कंपनियां लंबी अवधि के बॉन्ड्स से जुड़े प्राइस वोलेटिलिटी से बच रही हैं। यह रणनीति उन्हें आरबीआई (RBI) और अन्य ग्लोबल रेगुलेटर्स के मॉनेटरी पॉलिसी फैसलों पर अधिक स्पष्टता का इंतजार करते हुए अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने और लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करती है।

आगे क्या?

हालांकि जुलाई का इनफ्लो कॉर्पोरेट कैश फ्लो में स्थिरता को दर्शाता है, लेकिन मार्केट पार्टिसिपेंट्स का अनुमान है कि यह ट्रेंड अस्थिर बना रह सकता है। सितंबर में अगले तिमाही के एडवांस टैक्स पेमेंट की डेडलाइन के आसपास ऐसे ही आउटफ्लो की उम्मीद है। इसलिए, इन फंड कैटेगरी के निवेशकों को मैनेजमेंट के तहत असेट्स में समय-समय पर होने वाले उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि कॉर्पोरेट खजाने अपने निवेश की रणनीति को नेशनल टैक्स कैलेंडर के अनुसार समायोजित करना जारी रखेंगे। आने वाले महीनों में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये फ्लोज़ आने वाले इंटरेस्ट रेट सिग्नल्स और ग्लोबल आर्थिक स्थितियों में संभावित बदलावों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.