Old Bridge MF के CIO की चेतावनी: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडकैप वैल्यूएशन से बढ़ सकता है रिस्क

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Old Bridge MF के CIO की चेतावनी: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडकैप वैल्यूएशन से बढ़ सकता है रिस्क

Old Bridge Mutual Fund के CIO Kenneth Andrade ने बाजार को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और मिडकैप शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन मुनाफे पर दबाव डाल सकते हैं।

कच्चे तेल से जुड़ी चिंताएं

Old Bridge Mutual Fund के CIO Kenneth Andrade के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार के लिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के स्तर के करीब होने से घरेलू कंपनियों की लागत बढ़ रही है। भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक है, इसलिए कच्चे तेल का असर सीधे तौर पर कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत पर पड़ता है। इससे कंपनियों के बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ रहा है क्योंकि वे लागत का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पा रही हैं, जिससे आने वाली तिमाहियों में अर्निंग ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।

मिडकैप में वैल्यूएशन का दबाव

हालिया रैली में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों के वैल्यूएशन काफी ऊंचे स्तरों पर पहुंच गए हैं। हालांकि मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स ने अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन मौजूदा कीमतों पर गलती की गुंजाइश बहुत कम है। बाजार अब इन कंपनियों से लगातार बेहतर नतीजों की उम्मीद कर रहा है, और उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न होने पर शेयरों में बड़ी गिरावट आ सकती है। यह दौर बाजार में एक तरह का 'नॉर्मलाइजेशन' लाने के लिए जरूरी है।

पोर्टफोलियो में बड़ा बदलाव

इन चुनौतियों को देखते हुए, Old Bridge Mutual Fund अपनी निवेश रणनीति बदल रहा है। फंड ने IT सेक्टर से अपना फोकस हटाकर फार्मा (विशेषकर जेनेरिक्स), ऑटो और मेटल्स सेक्टर में हिस्सेदारी बढ़ाई है। ये सेक्टर्स अब उनके फोकस्ड फंड पोर्टफोलियो का लगभग 45% हिस्सा हैं। रणनीति यह है कि उन कंपनियों को चुना जाए जिनका स्केल बड़ा हो और जो वैश्विक स्तर पर मुकाबला करने में सक्षम हों।

भारतीय कंपनियों का ग्लोबल विजन

भले ही अभी इनपुट कॉस्ट का दबाव हो, लेकिन लंबी अवधि के लिए भारत की ग्रोथ उन कंपनियों पर निर्भर है जो वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बना रही हैं। अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया की तरह, भारतीय फर्मों को भी ग्लोबल फ्रेंचाइजी बनने पर जोर देना होगा। निवेशकों के लिए अगले कुछ महीनों में यह देखना सबसे जरूरी होगा कि कौन सी कंपनियां लागत बढ़ने के बावजूद अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखती हैं और अपने अंतरराष्ट्रीय कारोबार को आगे बढ़ाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.