Old Bridge Mutual Fund ने जुलाई 2026 के लिए अपने पोर्टफोलियो में अहम फेरबदल किए हैं। फंड मैनेजर केनेथ एंड्रेड के नेतृत्व में, फंड ने Jubilant FoodWorks और Delhivery जैसी कंपनियों में नया निवेश किया है, जबकि Axis Bank और Syngene International से अपनी हिस्सेदारी बेच दी है। ये कदम फंड की सक्रिय प्रबंधन रणनीति को दर्शाते हैं, जो बदलती वैल्यूएशन और कारोबारी संभावनाओं के अनुरूप है।
पोर्टफोलियो में क्या हुए बड़े बदलाव?
Old Bridge Mutual Fund ने जुलाई 2026 के लिए अपनी इक्विटी होल्डिंग्स का अपडेट जारी किया है। फंड हाउस, जो अपनी कड़े और केंद्रित निवेश रणनीति के लिए जाना जाता है, ने अपने फोकस्ड और फ्लेक्सीकैप फंड्स में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।
फोकस्ड फंड का नया दांव
फोकस्ड फंड में, फंड मैनेजरों ने Jubilant FoodWorks में 2.25 मिलियन शेयर खरीदकर एक नई पोजीशन बनाई है। इससे फंड के पोर्टफोलियो में 2.5% का वेटेज आया है। इसके अलावा, फंड ने मौजूदा होल्डिंग्स जैसे Tata Steel, Redington, Radico Khaitan और Hindustan Zinc में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। इससे संकेत मिलता है कि फंड मैनेजर इन कंपनियों में आगे भी ग्रोथ की संभावना देख रहे हैं।
फ्लेक्सीकैप फंड में बड़ा री-एलोकेशन
वहीं, फ्लेक्सीकैप फंड में लॉजिस्टिक्स कंपनी Delhivery और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी Redington में नई पोजीशन ली गई है। Delhivery में 2.4% और Redington में 2.8% का निवेश किया गया है। इसके साथ ही, फंड ने Axis Bank और Syngene International से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला किया है, जिनसे पहले 2.6% और 2.2% का वेटेज था।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
ये बदलाव सक्रिय रूप से मैनेज किए जाने वाले फंड्स की प्रकृति को दर्शाते हैं। जब कोई फंड किसी कंपनी से पूरी तरह बाहर निकलता है, तो यह माना जा सकता है कि फंड मैनेजरों को वहां ग्रोथ की संभावना कम लग रही है, वैल्यूएशन बहुत ज्यादा हो गया है, या वे अपने कैपिटल को कहीं और बेहतर तरीके से लगा सकते हैं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि Old Bridge Mutual Fund अपनी केंद्रित पोर्टफोलियो रणनीति के कारण, जिसमें कम स्टॉक्स होते हैं, ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखता है, लेकिन साथ ही इसमें वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) भी ज्यादा हो सकती है। यदि कुछ बड़ी होल्डिंग्स अच्छा प्रदर्शन नहीं करतीं, तो इसका असर पूरे पोर्टफोलियो पर ज्यादा दिख सकता है। फंड का फाइनेंस, फार्मा और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी खास फोकस है, इसलिए निवेशकों को अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के हिसाब से इन सेक्टर एलोकेशन पर नजर रखनी चाहिए।
